Love poem -कब से कहना चाहता हूँ

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कब से कहना चाहता हूँ कह नहीं पाता
पास रहना चाहता हूँ रह नहीं पाता
जब से तुम मिले हो फूल बिछे राह
और काटें हो गए सब ही तबाह
तुम्हारी मुस्कुराहट सबसे खूबसूरत है
दुनिया में क्या तुमसे भली भी कोई मूरत है
चाहता हूँ रखना तुमको सबसे करीब
खुदा काश ऐसे हों मेरे नसीब

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