Hindi Poem for Girlfriend – दिल कहता है

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मेरे दिल की अावाज़ है तू
प्रेम के सुर का साज़ है तू
अांखो से छलकती बरसात है तू
होठों से अनकही बात है तू
औरों के लिए होगी तू अप्सरा
मेरे लिए तो मुमताज़ है तू
दिल कहता है मेरा
तुझको दिल से पुकारूं
कभी तेरी जुल्फों से खेलूं
कभी तेरे बिखरे बाल सवारूं
कभी तुझको छू लूँ
कभी तुझको पा लूँ
कभी तुझको पूजूं
कभी तुझको चाहूँ
कभी यूँ ही मैं तुझको
अपना बना लूँ
-अनुष्का सूरी 

Hindi Love Poem- डायरी

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धूल जमी डायरी के कुछ पन्ने जो खोले,
तेरी यादो के सिलसिले फिर काबिज़ हो गए,
पलटता रहा पन्ने और फिर बहने लगा
जज्बातों का समुंद्र जो कभी हिलोरे लेता था मुझमे,
भले ही बेजान खामोश सी हो गयी थी
वो लहरे कुछ लम्हात के लिए,
पर यकीन मान एक तूफ़ान
तेरी यादो का हर रोज बहता था मेरी आँखों से,
आज जब खोली है वो डायरी तो खुश्बू के तरह महक रहा है
तेरा प्यार फिर से फिजाओ में,और भिगो रहा है
ये समुंद्र तेरी मोहब्बत का मुझे इस तरह
की जैसे मेरा पहला प्यार बस अभी इसी वक़्त ही हुआ हो।

गौरव

Hindi Love Poem- इश्क़ से अंजान

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माही मेरे इश्क़ को ना समझे मेरा यार,
गहरा बहुत है दिल मे मेरे आज तेरा प्यार,
तुझमे ही मैं खोई रहती,तुझको ही मैं सोचती,
सारी दुनिया बोलती जोगन बनी मैं यार,
मेरे दिल की सबने जानी पर वो वाबरा अंजान है,
वही कुछ नहीं जनता जिसे करूँ मैं प्यार,
जिसको सोचके हँसती हूँ,जिसमें ही मैं खोती हूँ,
जिसमे जीवन के रंग सजे,बस बना रहा वही मेरे इश्क़ से अंजान,
सच कहा है दुनिया ने जोगन तेरे इश्क़ को ना समझे तेरा यार,
करती है तू कितना उसको अपने दिल से प्यार,
बस बना रहा वही वाबरा इश्क़ से अंजान,तेरे इश्क़ से अंजान।

– गौरव

Hindi Love Poem – एक मीठा एहसास

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प्यार का पता नहीं की वो क्या होता है। पर जब हम मिलते हैं
एक अजनबी से तो सब कुछ बदल जाता है।
उसकी छोटी छोटी बाते बहुत हँसाती हैं।
और दिल है की एक खुद की ही दुनिया बसा लेता है।
शायद किसी अजनबी का साथ जो दिल को अच्छा लगने लगे वही प्यार होता है।
चलिये  प्यार के कुछ ऐसे ही रंग तलाशते हैं
एक नये प्यार की सुगबुगाहट हुई, दिल से दिल की कुछ बात हुई,
कशमकश में था ये दिल मेरा की कैसे ये दिल की हालत हुई,
सोचती रही रात भर तुमको,और सुबह की भी आहट हुई,
हिम्मत करके दिल ने मुझे संभाला,
और घबराते हुए बातो की शुरुआत हुई,
मैँ थी घबराई पर देखा जब पहली बार तुमको,
दिल में पुरानी सी जान पहचान सी निकल आई,
दिल बस तुमको ही सुने लगा।हर वक़्त तुमको ही जीने लगा,
कैसे ये दिल वगावत कर बैठा जो तुमसे मिलने चली आई,
होके मजबूर दिल से बस आके तुझमे समाई,
तुम्हारी हर बात अच्छी लगती है शहद सी घुली लगती है,
जो हुआ न था आज तक क्या वो मुझको हो गया,
ए मेरे अजनबी हमसफ़र क्या तुमसे प्यार हो गया,
अब तो तेरा जिक्र आते ही हया का एहसास होता है,
घूंघट में शर्म के छुपके दिल का हाल बेहाल होता है,
दोस्तों की बातों में भी वो हँसी नहीं  आती,
पर जिक्र आते ही तेरा हँसी मुझमें कहीं बस सी जाती है,
जो नाम था अजनवी आज वो अपना हो गया,
कोरे कागज पे हाँथो से लिख देती हूँ,
हथेली को मेहबूब की मेहंदी में घोल देती हूँ,
कैसा ये हाल बेहाल हो गया शायद  उस अजनबी से प्यार हो गया,
अब तो हर वक़्त तेरा ही ख्याल रहता है,
शाम से ही ढली रात का इंतज़ार रहता है,
उन्ही के ख्याल पर दिल हैरान रहता है,
बस देख लूँ एक बार फिर उनको यही दिल बार बार कहता है,
हाल ये मेरा कैसा हो गया है,शायद उस अजनबी से प्यार हो गया है,
एक पल में कोई अपना बना गया,
जो मेरा था दिल का चैन वो चुपके से ही चुरा गया,
एक बार कहा उसने आँखे तुम्हारी खूबसूरत हैं,
होंठ  भी बेमिसाल हैं, सादगी के रंगो से सजी हो तुम,
इतना तो मैं भी नही जानती थी खुद को जितना वो मुझको बता गया,
मुझमे समाके खुद से बेगाना बना गया,
शायद यही तो प्यार है की एक अजनबी कैसे अपना हो जाता है,
उसकी छोटी छोटी बातों पे भी प्यार नजर आता है,
करेला था जो कडुवा कभी वही शहद सा मीठा हो जाता है,
होता है जो अजनबी बरसों से दूजे पल वही दिल में समाता है,
उसी अजनबी से प्यार हो जाता है।
-गौरव

Hindi Love Poem- Emotional

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कुछ खो के लिखा
कुछ पा के लिखा

हमने इस कलम को
अक्सर आँसुओं में डुबो के लिखा

कभी मिली नसीहत
कभी वाह-वाही मिली

हमने अपने ग़मों को
अक्सर शब्दों में संजो के लिखा

– गीतेश बॉस

Hindi Poem For Girlfriend- दिल की बाते

11

कह दूँ आज सारी दिल की बाते
तू अच्छी लगती है
तेरी बाते अच्छी लगती है
तेरा रोना अच्छा लगता है
तेरा हँसना अच्छा लगता है
तेरा चलना अच्छा लगता है
तेरी गाली अच्छी लगती है
तेरा देखना अच्छा लगता है
तेरी नराजगी भी अच्छी लगती है
तेरी सूरत अच्छी लगती है
तेरी मुस्कान अच्छी लगती है
तेरी आँखे अच्छी लगती है
तेरा मारना अच्छा लगता है
तेरा घूरना अच्छा लगता है
तेरी दी हुई चीजें अच्छी लगती है
10 की फटी नोट अच्छी लगती है
तेरे बालो की पीन अच्छा लगता है
तेरा चश्मा अच्छा लगता है
मिर्ची खाकर रोना अच्छा लगता है
सारी चॉकलेट्स अच्छा लगता है
लाइब्रिरी की यादें अच्छी लगती है
तेरी जूती अच्छी लगती है
यहाँ तक तेरी साईकल भी अच्छी लगती है
तेरी गालिया अच्छी लगती है
तेरा सूट भी अच्छा लगता है
तेरे नखरे अच्छे लगते है
तेरी याद मे रोना अच्छा लगता है
तेरा करीब आना अच्छा लगता है
दुरिया को छोड़ बाकी सब अच्छा लगता है
तेरे पास बैठना अच्छा लगता है
तेरे साथ रोना अच्छा लगता है
तेरे साथ हँसना अच्छा लगता है
तेरे साथ चलना अच्छा लगता है
तुज़े मारना अच्छा लगता है
तेरी तड़प अच्छी लगती है
तेरी रन्गत अच्छी लगती है
तुझे डायरी मे लिखना अच्छा लगता है
तेरी तस्वीरे अच्छी लगती है
तेरी गलती अच्छी लगती है
तू सही है अच्छी लगती है
तेरा चिल्लाना अच्छा लगता है
तेरा चुप रहना अच्छा लगता है
तुज़े रुलाना अच्छा लगता है
तुज़े हँसाना अच्छा लगता है
पर इन सब से एक अलग एक और
तेरा गुस्सा
अब तो तेरा गुस्सा भी अच्छा लगता है
वजह ना पूछना यार
बस तुम और सिर्फ तुम अच्छे लगते हो
पागल था या पग्ला गया हूँ मालूम नहीं
गलत था या गलत हू मालूम नहीं
अब और क्या कहूं मैँ
बस तू अच्छी लगती है
तू अच्छी लगती है
और तू ही अच्छी लगती है

– गीतेश बॉस

Valentine’s Day Love Poem-वॅलिंटाइन की रात

एक वॅलिंटाइन की रात,be-my-valentine
वो मेरे दिल के पास,
आँखों से आँखों ki होने लगी बात,
तेरे पास फिर मैं आया
गोद में तुझे उठाया,
तेरी ज़ुल्फ़ों को
अपने हाथों से मैने सजाया,
फिर बैठ के तेरे सामने कही दिल की बात
इस वॅलिंटाइन की रात
मेरी प्रिन्सेस तुम हो बहुत खास,
सोचा तुमको आज मैं तोहफा क्या दूँ खास,
जो हर पल रहे तेरे दिल के पास,
फिर मैने हाथ बढ़ाया
तुझे गले से लगाया,
तेरे होंठों से अपने होंठों को
मैने फिर मिलाया,
खोल के तेरी ज़ुल्फ़ें
सितारों से सजाई,
प्यार के इन रंगों से
तेरी तस्वीर आज बनाई,
तुम थी बहुत खामोश
पर धड़कन में कुछ शोर था,
कह रही थी वो भी मुझसे
कि तेरे दिल में ना कोई और था,
फिर मैने तुझे सताया
ये कहके तुझे मनाया,
चुपचाप तू ना रहना
तू भी कुछ कहना,
मेरे साथ साथ तू भी प्यार के गीत गाना,
सजदे में तेरे झुक के मैं तुझको आज बताऊँ,
अब सारी उमर मैं वॅलिंटाइन तेरे साथ मनाऊँ,
बस तेरे साथ मनाऊँ.
-गौरव

Love Poem for Him-तेरी यादों में जीने लगी हूँ

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तेरी यादों में जीने लगी हूँ

तेरे गीतों को सुनने लगी हूँ

इस मीठी सी ठंड में आँखें नॅम होने लगी हैं

तेरी याद में नींदें खोने लगी लगी है

जब देखा दूर चमकते तारे को

उसकी चमक देख तेरी याद आई

जब देखा उपर खुले आसमान को

तेरी बाहों की याद आई.

जब बैठी नदी किनारे

बहते पानी में तू ही नज़र आया

फिर अपने आप से पूछ बैठी

क्या तुमने अपना प्यार पाया?

इस प्यार भरे लम्हे में खो गयी

ना जाने कब तेरे इतनी करीब हो गयी

तेरी ही बातें करने लगी हूँ

तुझे अपने गीतों में गुनगुनाने लगी हूँ

तेरी यादों में जीने लगी हूँ

-कविता परमार

Hindi Love Shayari for Her- तेरी आँखों में

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एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,
कि इनमें छुपा है प्यार बस मेरे लिये मेरे लिये,
एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,
कि पहलू में तेरे बैठ के, तेरी ज़ुल्फ़ों से यूँ खेल के,
बस दिल से मैं लिखता रहा, तुझे सोचते बस तुझे सोचते,
एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,
कि शाम भी अब ढल गयी, तेरे पहलू में सिमट गयी,
कि चांदनी भी अब तेरे हुस्न से पिघल गयी,
एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,
गीतों को लिखता रहूँ, तुझ में ही मैं जीता रहूँ,
कि मेरी धड़कन भी तेरी धडकनों से जुड़ गयी,
एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,
अल्फ़ाज़ भी मेरे नहीं, ये गीत भी मेरा नहीं,
बस तू ने जो ना कहा लिख दिया तुझे सोच के,
एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,
कि वक़्त भी अब थम गया, जो तूने वो कह दिया,
कि आए मेरे हमसफर ये दिल भी है तेरे लिये,
एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,
जब मैने वो सुन लिया, धड़कन को तेरे जी लिया,
तुझे पहलू में समेट के होश में ना मैं रहा,
एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,
कि इन में छुपा है प्यार बस मेरे लिये बस मेरे लिये|
-गौरव

Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki inmein chupa hai pyar bas mere liye mere liye,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki pahlu mein tere baith ke, teri zulphon se yoon khel ke,
Bas dil se main likhta raha, tujhe sochte bas tujhe sochte,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki sham bhi ab dhal gayi, tere pahlu mein simat gayi,
Ki chandni bhi ab tere husn se pighal gayi,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Geeton ko likhta rahoon, tujh mein hi main jeeta rahoon,
Ki meri dhadkan bhi teri dhadkanon se jud gayi,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Alfaz bhi mere nahin, ye geet bhi mera nahin,
Bas tu ne jo na kaha likh diya tujhe soch ke,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki waqt bhi ab tham gaya, jo toone wo kah diya,
Ki ae mere hamsafar ye dil bhi hai tere liye,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Jab maine wo sun liya, dhadkan ko tere jee liya,
Tujhe pahlu mein samet ke hosh mein na main raha,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki in mein chupa hai pyar bas mere liye bas mere liye|
-Gaurav