Hindi Love Poem on Crush-Dekha Jab Use

देखा जब उसे
देखा जब उसे …
दिल में आग लग गयी ….
वक्त थम गया
और धडकन रुक गयी …
पास जाकर देखा
तो चांद सी खिल गयी …
कुर्ता जॅकेट में
अप्सरा सी मिल गयी ….
क़ातिल निगाहों में
चमक उठी थी …
उसकी हर मुस्कुराहट पे
सांसे रुकी थी …
उसकी हर अदाओं पे
हम फिदा हो गए …
जन्नत सी दिख गयी
और हम वफा हो गए ….
-संकेत गुंगे

Hindi Love Poem on Her Intoxicating Eyes-Maikhana Yad Aya

मैखाना याद आया

तेरी आँखों की बात हो तो पैमाना याद आया!
उल्फ़त जो याद आयी तो मैखाना याद आया!

दुनिया वाले करते है इश्क़ और गम की बातें!
जब भी देखा शमा को तो परवाना याद आया!

ज़माने भर की बातो में कही भूल न जाना हमें!
अक्सर ख्वाबों में तेरा मुस्कुराना याद आया!

बरसात के मौसम में वो बहुत याद आये हमें!
उनकी जवानी और अपना ज़माना याद आया!

किसी ने पूछा हम से की इश्क़ कैसे करते हो!
फरहाद, रांझा, मजनूँ सा दीवाना याद आया!

-अनूप

AnoopS ©

Hindi Love Poem-Samay Mile To Akar Milna

समय मिले तो आकर मिलना
लाइब्रेरी की टेबल पर,
कुछ न बोलेंगें हम ज़ुबाँ से
और अटकेंगे किताबों पर,
पलटेंगे पेजों को यूँ हीं
लफ्ज़ सुनेंगें हज़ारों पर,
लिखे हुए लैटर का क्या करना ?
जज़्बात पढ़ेंगे आँखों पर,
दांतों तले कभी होंठ दबाते
मुस्कान छुपायेंगे होंठों पर,
समय मिले तो आकर मिलना,
लाइब्रेरी की टेबल पर।

(इस कविता के रचनाकार के सम्बन्ध में विवाद होने के कारण कवि का नाम हटा दिया गया है )

Hindi Love Poem For Her-तुम जो संग बने रहो

हम सारे वादों को निभाएंगे,
जिंदगी को सफल बनाएंगे,
तुम जो संग बने रहो,
तुम वादा करके मुकर ना जाना,
मेरे दर्द प्रार्थनाओं को खोरी-कोटी ना सुनाना,
फिर भी तुमसे किया वादा निभाउंगा,
तुम जो संग बने रहो।
तुम्हारे कारण हर चाहत से इज़हार है मेरा,
तुम्हारे कारण हर जीत से प्यार है मेरा,
मेरा सीरत ये बढ़ता रहेगा,
तुम जो संग बने रहो।
कल को कायनात बदल दूंगा,
हर हार को जीत लूंगा,
हर कोशिश वो बार बार करुंगा,
तुम जो संग बने रहो।
तुम्हारे हँसी सपनों के लिए,
तुम्हारे हैसी अपनो के लिए,
हर एक से मतलबी हो जाऊ,
तुम जो संग बने रहो।

-राम

Hum sare waadon ko nibhayenge
Zindagi ko safal banayenge
Tum jo sang bane raho
Tum wada Karke mukar na jana
Mere achche prayas ko khari-koti na sunana
Phir bhi Tumse kiya wada nibhaunga
Tum jo sang bane raho
Tumhare karan har chahat se izhaar hai mera
Tumhare karan har jeet se pyar hai mera
Mera seerat ye badhta rahega
Tum jo sang bane raho
Kal ko kayanat badal dunga
Har haar ko jeet lunga
Har koshish wo bar bar Karunga
Tum jo sang bane raho
Tumhare hasi sapnon ke liye
Tumhare hasi apno ke liye
Har ek se matlabi ho jaun
Tum jo sang bane raho.

-Ram

Hindi Love Poem Expressing Love – चाँद चांदनी को चाहता है जिस कदर

चाँद चांदनी को चाहता है जिस कदर,
उस कदर चाहूँ मैं तुझे।
मेरी एक खुवाईश है कि बस,
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

मुझे अच्छी तरह याद है वो दिन,
जब हमारा मिलन हुआ ,
ये भी याद है तुम ने उस दिन क्या पहना हुआ था,
हमारी किस बात से वार्तालाप शुरू होई थी.
बस उस दिन के बाद मेरा दिल तेरी याद में सदा डूबे,
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

तुम मेरे पास होती हूँ तू मुझे लगता है की दुनिया की हर ख़ुशी है मेरे पास.
जब तुम मेरे पास नहीं तो मेरे पास कुछ भी नहीं,
तुम्हारे बिना इस दिल को और कुछ भी नहीं सूझे ,
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

जब से तुम मुझे मिले हूँ मेरा दिल मेरे बस में नहीं.
ये दिल बस तुम्हें खुश देखना चाहता है,
जब तुम खुश होते हूँ तो मुझे सारी कयानात खुश नज़र आती है,
जब तुम उदास होते हूँ तो मुझे अपने आप से नफरत होती है,
बस मेरा दिल तुझे भगवान की तरह पूजे ,
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

ना मेरे पास ज़्यादा पैसा ना ज़्यादा दौलत ,ना ही ज़्यादा शौरत,
मैं तुम्हें प्यार करता था, करता हूँ और करता रहूँगा ,
बस तुम हमेशा के लिए मेरी बन जाओ और कुछ ना चाहूँ मैं उस खुदा से,
बोलो भूषण अपनी फैमिली से कब मिलवाये तुझे ।
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

-भूषण धवन

Chand Chandni ko chahta hai jis kadar,
Us kadar chahu main tujhe ish kadar ,
Meri ek khwayish hai ki bas,
Ya tu meri ban ja ya apna bana le tu mujhe,

Mujhe acchi tarah yaad hai wo din,
Jab hamra Milan hua ,
Ye bhi yaad hai tumne us din kya pehna hua tha,
Hamari kis baat se vartalap shuru huyi thi,
Bas us din ke baad mera dil teri yaad me sada dube,
Ya tu meri ban ja ya apna bana le tu mujhe,

Tum mere pass hoti ho to mujhe lagta hai ki
duniya ki har khushi hai mere pass,
Jab tum mere pass nahi to mere pass kuch bhi nahi,
Tumhare bina ish dil ko aur kuch bhi nahi sujhe,
Ya tu meri ban ja ya apna bana le tu mujhe,

Jab se tum mujhe mile ho mera dil mere bas me nahi,
Ye dil bas tumhien khush dekhna chahta hai,
Jab tum khush hote ho to mujhe sari kayanat khush nazar aati hai,
Jab tum udas hote ho to mujhe apne aap se nafrat hoti hai,
Bas mera dil tujhe bhagwan ki tarah puje,
Ya tu meri ban ja ya apna bana le tu mujhe,

Na mere paas jyada paisa, na jyada daulat aur na hi jyada shauhrat,
Main tumehin pyar karta tha, karta hu aur karta rahunga,
Bas tum hamesha ke liye meri ban jao aur kuch na chahu main us khuda se,
Bolo bhushan apni family se kab milwaye tujhe,

– Bhushan dhawan

Miss You Love Poem- याद है

 

याद है मुझे आज भी उनसे
मेरी पहली मुलकात का वो सफर
था वो बड़ा ही खास दिन मेरे लिये
था वो सफर लम्बा पर सुनकर
उनकी मीठी आवाज कर दिया
सफर मेरा सुकून भरा
मेरे सफर की पूरी थकान उतर गई
जब उसने मुस्कुरा के मुझे देखा याद है
मुझे मेरी नयी ज़िंदगी की नई शुरुआत
इसी ऐसी सफर से मिली वो सफर
सिर्फ एक सफ़र नहीं बल्कि
मेरी ज़िन्दगी की नयी ख़ूबसूरत सूरत थी
याद है मुझे आज भी उसने
हमारी पहली मुलाक़ात का वो सफर

-भारत ठाकुर

Yaad hai mujhe aaj bhi unse
Meri pehli mulakat ka vo safar,
Tha vo bada hi khaas din mere liye,
Tha vo safar lamba par sunkaar
Unki mithi aavaaz kar diya
Safar mera sukun bhara
Mere safar ki puri thakaan utri gayi
Jab usne muskurake muje dekha yad hai…
Muje meri nai zindagi ki nai suruaat
Esi safar se mili.. vo safar
Ssirf ek safar nai balki
Meri jindgi ki nayi khubsurat suruat thi
Yaad hai muje aaj bhi usne
Hamari pehli mulakat ka vo safar
Kese baya karu apne vo jazbaat…
Meri mulakat ka vo safar…

-Bharat Thakor

Hindi Love Poem on Separation-आँखें जो खुली

आँखें जो खुली तो उन्हें अपने करीब पाया ना था
कभी थे रूह में शामिल आज उनका साया ना था
बेपनाह मोहब्बत की जिनसे उम्मीदें लिये बैठे थे
उनसे तन्हाइयों की सौगातें मिलेंगी बताया ना था
एक हम ही कसीदे हुस्न के हर बार पढ़ते रहे पर
उसने तो कभी हाल-ए-दिल सुनाया ना था
वो फिरते रहे दिल में ना जाने कितने राज लिये
हमने तो कभी उनसे जज्बातों को छुपाया ना था
जाने क्यों हम बेवजह मदहोश हुआ करते थे
जाम आँखों से तो कभी उसने पिलाया ना था
मीलों कब्ज़ा कर बना रखा था सपनों का महल पर
उसने वो ख़्वाब कभी आँखों में सजाया ना था
धड़कन ‘मौन’ हुई अब एक आह की आवाज़ है
शिकवा क्या उनसे जिसने कभी अपना बनाया ना था

-अमित मिश्रा

Aankhein jo khuli thi to unhe apne kareeb paya naa tha
Kabhi they ruh mein shamil aaj unka saya naa tha
Bepanaah mohabbat ki jinse umid liye beithe they
Unse tanhai ki saugate milegi btaya naa tha
Ek hum hi kaside husan ke har baar padte rahe par
Unse to kabhi haal ae dil sunaya naa tha
Wo firte rahe dil me naa jane kitne raaz liye
Hamne to kabhi unse jazbaton ko chupaya naa tha
Jane kyon hum bevajah madhosh hua karte they
Jaam aankhon se to kabhi usne pilaya na tha
Milon kabza kar bana rakha tha sapno ka mahal par
Usne wo khwab kabhi aankhon me sajaya na tha
Dhadkan maun hue ab ek aah ki aawaz hai
Shikwa kya unse jisne kabhi apna banaya naa tha

-Amit Mishra

Hindi Love Poem Expressing Love-मेरी बात

आज फिर हमारी नज़रे मिली
वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी
उसके होठों की हसी मुझे बहाने लगी
मुझे लगा की आज अपने दिल की बात कह दूंगा
जो होगा उसे सच मान आगे बढ़ लूँगा
मगर उसे किसी और से प्यार था
वो तो किसी और पे मरती थी और
मैं उसके लिये सिर्फ उसका एक यार था
मेरे दिल में उसके लिये सिर्फ और सिर्फ प्यार था
इसलिये मेरी हिम्मत फिर से हार गयी
उससे अपने दिल की बात कहने की
अपने दिल के जज़्बात कहने की
वो खवाहिश फिर से खत्म कर दी
ये दिल की फ़रमाइश पूरी ना हो सकी और
फिर से मेरी बात अधूरी रह  गयी

– मनोहर मिश्रा

Aaj fir humari nazare mili
Vo mujhe dekhkar muskurane lagi
Uske hotho ki hasi mujhe bhane lagi
Mujhe laga ki aaj apne dil ki baat keh dunga
Jo hoga usse sach maan aage badh lunga
Magar usse kisi or se pyar tha
Vo to kisi or pe marti thi or
Mai uske lye sirf uska ek yaar tha
Mere dil me uske lye sirf or sirf pyar tha
Islye meri himmat fir se haar gayi
Usse apne dil ki baat kehne ki
Apne dil ke jazbaat kehne ki
Vo khawahish fir se khatm kar di
Ye dil ki farmaish puri na ho saki Or
Phir se meri baat adhuri reh gayi

-Manohar Mishra

 

Hindi Love Poem For Her- चलते रहने दो

दीदार-ऐ-नजर ना सही सपनों में आते रहिये
मुलाकातों का सिलसिला यूँ ही चलते रहने दो
लब खामोश अगर तो क्या आँखों से बताते रहिये
इस दिल को अपनी बेकरारी यूँ ही कहते रहने दो
हवा आहिस्ता बहे तो क्या इन जुल्फों को उड़ाते रहिये
इन केशों को हंसी चेहरे पे यूँ ही बिखरते रहने दो
लाख गम हो सीने में मगर फिर भी मुस्कुराते रहिये
इन हंसी के फुहारों को यूँ ही निकलते रहने दो जल्द होगी
मुलाक़ात उनसे खुद को समझाते रहिये
तुम ‘मौन’ सही पर अरमानों को यूँ ही मचलते रहने दो

-अमित मिश्रा

Deedar a nazar na sahi sapno me aate rahiye
Mulakaton ka silsila yoon hi chalte rahne do
Lab khamosh agar to kya aankhon se btate rahiye
Es dil ko apni bekarari yoon hi kahte rahne do
Hawa aahista bahe to kya en Zulfon ko uadate rahiye
En julfon ko hassi chehre pe yoon hi bikhrte rahne do
Lakh gam ho sine me magar fir bhi muskurate rahiye
En hasi k fuharon ko yoon hi nikle rhe do
Jaldi hogi mulakaat unse khud ko samjhate rahiye
Tum maun sahi par armanon ko yoon hi machalte rhne do

-Amit Mishra