Sad Poem for Him-Tumse

तुमसे
उस एक दिन जब बातें शुरू हुई तुमसे
लगा कुछ तो अलग सा है तुम में
लगा कुछ तो नया सा है तुम में
फिर रोज़ की बातें होती गयी
और यूं बिना सोचे पिघलती रही मैं उन में
यूं ही बिना समझे फिसलती रही उस रास्ते पे
हाँ पता था मुझको दोबारा उसी रास्ते जा रही हूँ जहाँ गम बहुत हैं
पर गम की क्या बिसात यहाँ तुम्हारा साथ बहुत है
उस दिन जब पहली मुलाकात हुई तुमसे
लगा जैसे मैं खुद को मिल गयी
मेरे अंदर की मुरझाई कली खिल गयी
फिर तुम्हारा मुझको छूना
चूमना मुझको गले लगा कर
कसम से मेरे अंदर कुछ तो कमाल कर गया
बहुत दिनों से शांत मेरे मन में सवाल कर गया
फिर मिलना हुआ और मिलते रहना हुआ
तुम्हारी बातें तुम्हारी आँखों से पढ़ना हुआ
तुझको ढूंढ कर तुझमें ही खोना हुआ
सच, ये एक प्यार सिर्फ तुमसे कई हज़ार बार हुआ
फिर हुआ कुछ बुरा
शायद उपरवाले की मर्ज़ी थी
तेरा मुझसे कई दफे रूठ जाना हुआ
मेरा तुझको हर दफे मनाना हुआ
और हर आंसू के बाद भी
दुआ में उठे हाथ
और झुकी नज़रों में तेरी खैरियत का आना हुआ
-अश्वनी कुमार

Tumse
Us ek din jab baatein shuru hui tumse (That day when I started talking to you)
Laga kuch to alag sa hai tum mein (I felt you were different from others)
Laga kuch to naya sa hai tum mein (I felt that there is something new in your personality)
Fir roz ki baatein hoti gayi (Then, we started talking on a daily basis)
Aur yoon bina soche pighalti rahi main un mein (And I started falling for you)
Yoon hi bina samjhe fislati rahi us raste pe (I started walking on the path of love without thinking much)
Haan pata tha mujhko dobara usi raste jaa rahi hoon jahan ghum bahut hain (Yes, I was aware that I am again walking on the path that is full of sorrows)
Par gam ki kya bisaat yaha tumhara saath bahut hai (But who worries about sorrows when you are by my side)
Us din jab pehli mulaqaat hui tumse (That day when I met you for the first time)
Laga jaise main khud ko mil gayi (I felt as if I met myself)
Mere andar ki murjhayi kali khil gayi (I regained my motivation)
Fir tumhara mujhko chuna (Then your touch)
Chumna mujhko gale laga kar (Kissing me while embracing me)
Kasam se mere andar kuchh toh kamaal kar gaya (I swear, it changed me)
Bahut dino se shaant mere man mein sawal kar gaya (It created questions in my peaceful mind)
Fir milna hua aur milte rehna hua (Then I kept seeing you and meeting you)
Tumhari baatein tumhari aankhon se padhna hua (I read your eyes while we talked)
Tujhko dhundh kar tujh mein hi khona hua (I felt lost in you)
Sach… Yeh ek pyar sirf tumse kai hazaar baar hua (I fell in love with you a thousand times)
Fir hua kuch bura (Then something bad happened)
Shayad uparwale ki marzi thi (Maybe, it was God’s will)
Tera mujhse kai kai dafe rooth jana hua (You were annoyed with me many times)
Mera tujhko har dafe manana hua (I tried to console you each time)
Aur har aansoo k baad bhi (And even after every tear)
Dua mein uthe hath (I prayed for you)
Aur jhuki nazaron mein teri khairiyat ka aana hua (And I got to know that you are doing fine)
-Ashwani Kumar

Sad Hindi Love Poem-Ek Sahara Mila Tha

एक सहारा मिला था (कविता का शीर्षक)

एक सहारा मिला था,
जीवन में आगे बढ़ने के लिए
आज वो भी छूटा सा नज़र आ रहा है
जो बनाया था कभी सपनों का महल,
आज वो भी टूटा से नज़र आ रहा है
जीवन की नदी पार करने का
कोई किनारा नहीं दिखाई पड़ता,
बस चारों ओर समंदर नज़र आ रहा है
उलझ गया है पंक्षियों का आशियाना,
हर तरफ बस बंजर ही नज़र आ रहा है
जिंदगी तो तेरे साथ थी मेरे यार,
अब तो मौत ही हमसफ़र नज़र आ रहा है
-निहारिका चौधरी (कवयित्री)

English Translation for International Readers:

Ek Sahara Mila Tha (I had found a refuge)

Ek sahara mila tha (I had found a refuge),

Jeevan mein age badhne ke liye (To progress in life)

Aaj wo bhi chuta sa nazar araha hai (Today that too is appearing to go away)

Jo banaya tha kabhi sapno ka mahal (The palace of my dreams that I had made)

Aj wo bhi tuta sa nazar araha hai (Today it appears to be broken)

Jeevan ki nadi paar karne ka (To cross the river of life)

Koi kinara nahi dikhai padta (I do not see any bank)

Bas charo or samandar nazar araha hai (I only see water on all the four sides)

Ulajh gaya hai pakshiyo ka ashiyana (The nest of birds has become complicated)

Har taraf bas banjar hi nazar araha hai (I only see drought everywhere)

Zindagi to tere sath thi mere yar (I had a great life with you my friend)

Ab to maut hi hamsafar nazar araha hai (Now, I only see death as my companion).

-Niharika Chaudhary (Poet)

Hindi Love Poem on Relationship-Rishtey Ki Ehmiyat

रिश्ते की एहमियत
जड़ों में ज़ख्म लग जायें
तो शाखें सूख जाती हैं,
मिले हों मन अगर
तो बातें रास आती हैं,
दो लोगों की ज़रूरत को
कोई क्या जान पाया है,
जुदाई एक दूजे की
अहमियत को बताती है ।
भदौरिया निहारिका (रचनाकार )

Meaning with English Translations (for international and non-Hindi readers):

Rishtey Ki Ehmiyat (The Importance of a Relationship)

Jadon mein zakhm lag jayen

If the roots of a tree are injured

to shakhein sookh jati hain,

then its branches become dry,

Mile ho man agar

If the hearts are in a sync

to batein raas aaati hain,

then the talks of each other are appreciated by both,

Do logon ki zarurat ko

The needs of two people (couple)

koi kya jaan paya hai,

who else can understand them,

Judai ek duje ki,

Separation makes a couple aware

ehmiyat ko btati hai.

about the importance of each other (in their life).

Bhadauriya Niharika (Poet)

Hindi Love Poem – Veh Pal

‘वह पल’

सालों का इंतज़ार एक पल बनके खड़ा था

चाह तो थी कुछ और लेकिन समय विपरीत ही चल पड़ा था ।।

पल की नज़दीकी क्षणिक और थी

समय का चक्र भी मानो स्थल सा पड़ा था ।।

आते ही उसके मैं समझ से बाहर खड़ा था

मानो किसी बंजर जमीन को पानी का स्पर्श मिला था ।।

चाहता तो था उसे रोकना पर इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में

खुद को साबित करना अभी बाकी बचा था ।।

-सुमित रघुवंशी

How to read:

Vah Pal

Salo ka intzar ek pal banke khada tha

Chah to thi kuch aur lekin samay vipreet hi chal pada tha

Pal ki nazdeeki shanik aur thi

Samay ka chakra bhi mano sthal sa pada tha

Aate hi uske mai samajh se bahar khada tha

Maano kisi banjar zameen ko paani ka sparsh mila tha

Chahta to tha usey rokna par is bhag-daud bhari zindagi mei

Khud ko sabit karna abhi baaki bacha tha.

-Sumit Raghuvanshi

Hindi Poem Praying for Love-Ae Khuda Uske Sath Rakh

ऐ खुदा उसके साथ रख
थोड़ा पास रख
उसकी ख़ुशी के लिए तेरे पास आया हूँ
मेरी दुआ अब तेरे क़दमों में रख

मानता हूँ भूल गया था मैं
लेकिन अब वापिस आया हूँ तो निराश न रख

बच्चा समझ के माफ़ कर दे मुझे
तेरे क़दमों में मेरे लिए थोड़ी सी जगह रख
ऐ खुदा उसके साथ रख
थोड़ा पास रख

प्यार करता हूँ मैं उस से बेपनाह
दूर होके नहीं रह सकता उसके बिना

शादी न सही
लेकिन उसको मेरी नज़रों के सामने रख
ऐ खुदा उसके साथ रख
थोड़ा पास रख

-The Fiend

Hindi Love Poem on Separation-आँखें जो खुली

आँखें जो खुली तो उन्हें अपने करीब पाया ना था
कभी थे रूह में शामिल आज उनका साया ना था
बेपनाह मोहब्बत की जिनसे उम्मीदें लिये बैठे थे
उनसे तन्हाइयों की सौगातें मिलेंगी बताया ना था
एक हम ही कसीदे हुस्न के हर बार पढ़ते रहे पर
उसने तो कभी हाल-ए-दिल सुनाया ना था
वो फिरते रहे दिल में ना जाने कितने राज लिये
हमने तो कभी उनसे जज्बातों को छुपाया ना था
जाने क्यों हम बेवजह मदहोश हुआ करते थे
जाम आँखों से तो कभी उसने पिलाया ना था
मीलों कब्ज़ा कर बना रखा था सपनों का महल पर
उसने वो ख़्वाब कभी आँखों में सजाया ना था
धड़कन ‘मौन’ हुई अब एक आह की आवाज़ है
शिकवा क्या उनसे जिसने कभी अपना बनाया ना था

-अमित मिश्रा

Aankhein jo khuli thi to unhe apne kareeb paya naa tha
Kabhi they ruh mein shamil aaj unka saya naa tha
Bepanaah mohabbat ki jinse umid liye beithe they
Unse tanhai ki saugate milegi btaya naa tha
Ek hum hi kaside husan ke har baar padte rahe par
Unse to kabhi haal ae dil sunaya naa tha
Wo firte rahe dil me naa jane kitne raaz liye
Hamne to kabhi unse jazbaton ko chupaya naa tha
Jane kyon hum bevajah madhosh hua karte they
Jaam aankhon se to kabhi usne pilaya na tha
Milon kabza kar bana rakha tha sapno ka mahal par
Usne wo khwab kabhi aankhon me sajaya na tha
Dhadkan maun hue ab ek aah ki aawaz hai
Shikwa kya unse jisne kabhi apna banaya naa tha

-Amit Mishra

Miss You Love Poem-याद जब भी उसकी आती है

याद जब भी उसकी आती है रातों की नींद उड़ ही जाती हैं
मेरे दिल का हाल ना पूछो प्यारे आशिकी ऐसे ही होती है
तेरे खोने का गम है मुझको तेरी यादें बहुत सताती हैं
याद जब भी उसकी आती है तूने धोखा दिया
वह बेवफा तेरी यादें मुझे रुलाती हैं तेरे इश्क में पागल था
मैं तेरी यादें मुझे तड़पाती हैं याद जब भी उसकी याद आती है
तू तो कहती थी की उम्र भर में साथ हूं फिर यह कैसी जुदाई है
धोखा दिया तूने हमको क्या यही आशिकी कहलाती है
याद जब भी उसकी याद आती है रातों की नींद उड़ ही जाती ।

– चंद्रभान सिंह

Yaad jab bhi uski aati hai to raaton ki neend ud jati hai
Mere dil ka haal na phucho pyare aashiqi ese hi hoti hai
Tere khone ka gam hai mujhko teri yaad bhut satati hai
Yaad jab bhi uski aati hai tune dokha diya
Ve bewafa teri yaadein muje rulati hai tere ishq me pagal tha
Main teri yaadein muje tadpati hai yaad jab bhi uski yaad aati hai
Tu to kahti thi ki umar bhar main sath hoon fir ye kaisi judai hai
Dokha diya tune hamko kya yahi ashiqi kehlati hai
Yaad jab bh uski yaad aati hai raaton ki neend ud jati hai

Chanderbhan Singh

Miss You Hindi Love Poem – ठीक हूँ मैं

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देखा जवाब मिला मुझे कि,
परेशान नहीं ठीक हूँ मैं।

तुम सोचना नहीं मुझे कभी,
तुम ढूंढना नहीं मुझे कभी,
परेशान नहीं ठीक हूँ मैं।

जब तस्वीरे देख जाओ कभी,
जब आँखों में पानी लाओ कभी,
रुमाल निकाल पोछ सकते हो,
या इतना पानी तो सोख सकते हो
पर मुझे कुछ नहीं कहना क्योंकि,
परेशान नही ठीक हूँ मैं।

जब लिखा हुआ कुछ मिल जाए,
दिल में फिर से अरमां खिल जाए,
कुछ नहीं दबा लेना सब कुछ,
या किताब बना देना सब कुछ,
पर मुझे कभी मत पढ़ाना क्योंकि,
परेशान नहीं ठीक हूँ मैं।

याद में तुम रात गुज़ार दो अगर,
ये कोई नई बात नहीं होगी मगर,
चाँद को देखते मेरा अश्क नज़र आये,
मुँह फेर लेना अपना शायद इश्क़ मर जाये,
पर मुझे परेशान मत करना क्योंकि,
परेशान नहीं ठीक हूँ मैं।

।।गीतेश नागेंद्र।।

Cross-Cultural Love Story-बला होते

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ज़ालिम , सितमगर , क़ातिल या बला होते
तुम कुछ भी होते पर मेरी क़िस्मत में तो होते

कुछ और जगह रखते अपने महल में मुलाजिम की
तेरे सजदे में सर झुकाते और तेरी ख़िदमत में हम होते

कभी चखने तो आते तुम मेरी नज़्मों के जाम को
फिर रोज़ पिया करते तेरी आदत में हम होते

तेरे काले लिबास पर करते नारंगी ज़रदोजी
बस टाँकते चाँद सितारे और बड़ी राहत में हम होते

तुम्हें मिलता बड़ा सौदा और वो भी बड़ा सस्ता
तेरी एक झलक की बस लागत में हम होते

तुम होते रंगरेज मेरे फिर चाहे जिस रंग में रंगते
कितना खिल के आते जो तेरी रंगत में हम होते

तुम हो जाते खुदा हमारे हम तुम्हारी इबादत करते
बस एक खुदा होता तो ना मज़हबी झंझट में हम होते
-सौरभ आनंद

How to read:

Zalim sitamgar quatil ya balaa hote
Tum kuch bhi hote par meri kismat me to hote

Kuch aur jagah rakhte apne mahal me mulazil ki
Tere sajde me ser jhukate aur teri khidmat me hum hote

Kabhi chakne to aate tum meri nazmo ke jaam ko
Fir roz piya karte teri adat me hum hote

Tere kale libaas par karte narangi zardozi
Bus tankte chaand sitare aur badi rahat me hum hote

Tumhe milta bada sauda aur vo bhi bada sasta
Teri ek jhalak ki bus lagat me hum hote

Tum hote rangrez mere fir chahe his rang me rangte
Kitna khil ke aate jo teri rangat me hum hote

Tum ho jate khuda humare hum tumhari inadat karte
Bus ek khuda hota to na majhani jhanjhat me hum hote

-Saurabh Anand