Hindi Poem Expressing Love-Kuch Kaho To Sahi

कुछ कहो तो सही

एक अजनबी तुम एक अजनबी हम
अनजानी राहों में मिल जाएंगे
कुछ कहो तो सही
गर बात होगी, तो तनहा न ये रात होगी
ये खामोश लब खुद-ब-खुद मुस्कुरायेंगे
कुछ कहो तो सही
गमों को उतार इन एहसासों में डूबकर तो देखो
ज़ख्म खुद-ब-खुद भर जाएंगे
कुछ कहो तो सही
हाथों में हाथ होगा, एक-दूजे का साथ होगा
ये दृग-मेघ खुद-ब-खुद बरस जाएंगे
कुछ कहो तो सही
वक्त के उन क्रूर पलों को बिसार दो
कुछ इबादत तुम्हारी कुछ दुआ हमारी रंग लाएंगे
कुछ कहो तो सही
ये असहज मौन न साधो
क्या भरोसा इन लम्हों का कब बिछड़ जाएंगे
कुछ कहो तो सही ।

-ज्योति आशुकृषणा

Hindi Love Poem Expressing Love – चाँद चांदनी को चाहता है जिस कदर

चाँद चांदनी को चाहता है जिस कदर,
उस कदर चाहूँ मैं तुझे।
मेरी एक खुवाईश है कि बस,
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

मुझे अच्छी तरह याद है वो दिन,
जब हमारा मिलन हुआ ,
ये भी याद है तुम ने उस दिन क्या पहना हुआ था,
हमारी किस बात से वार्तालाप शुरू होई थी.
बस उस दिन के बाद मेरा दिल तेरी याद में सदा डूबे,
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

तुम मेरे पास होती हूँ तू मुझे लगता है की दुनिया की हर ख़ुशी है मेरे पास.
जब तुम मेरे पास नहीं तो मेरे पास कुछ भी नहीं,
तुम्हारे बिना इस दिल को और कुछ भी नहीं सूझे ,
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

जब से तुम मुझे मिले हूँ मेरा दिल मेरे बस में नहीं.
ये दिल बस तुम्हें खुश देखना चाहता है,
जब तुम खुश होते हूँ तो मुझे सारी कयानात खुश नज़र आती है,
जब तुम उदास होते हूँ तो मुझे अपने आप से नफरत होती है,
बस मेरा दिल तुझे भगवान की तरह पूजे ,
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

ना मेरे पास ज़्यादा पैसा ना ज़्यादा दौलत ,ना ही ज़्यादा शौरत,
मैं तुम्हें प्यार करता था, करता हूँ और करता रहूँगा ,
बस तुम हमेशा के लिए मेरी बन जाओ और कुछ ना चाहूँ मैं उस खुदा से,
बोलो भूषण अपनी फैमिली से कब मिलवाये तुझे ।
या तू मेरी बन जा या अपना बना ले तू मुझे।

-भूषण धवन

Chand Chandni ko chahta hai jis kadar,
Us kadar chahu main tujhe ish kadar ,
Meri ek khwayish hai ki bas,
Ya tu meri ban ja ya apna bana le tu mujhe,

Mujhe acchi tarah yaad hai wo din,
Jab hamra Milan hua ,
Ye bhi yaad hai tumne us din kya pehna hua tha,
Hamari kis baat se vartalap shuru huyi thi,
Bas us din ke baad mera dil teri yaad me sada dube,
Ya tu meri ban ja ya apna bana le tu mujhe,

Tum mere pass hoti ho to mujhe lagta hai ki
duniya ki har khushi hai mere pass,
Jab tum mere pass nahi to mere pass kuch bhi nahi,
Tumhare bina ish dil ko aur kuch bhi nahi sujhe,
Ya tu meri ban ja ya apna bana le tu mujhe,

Jab se tum mujhe mile ho mera dil mere bas me nahi,
Ye dil bas tumhien khush dekhna chahta hai,
Jab tum khush hote ho to mujhe sari kayanat khush nazar aati hai,
Jab tum udas hote ho to mujhe apne aap se nafrat hoti hai,
Bas mera dil tujhe bhagwan ki tarah puje,
Ya tu meri ban ja ya apna bana le tu mujhe,

Na mere paas jyada paisa, na jyada daulat aur na hi jyada shauhrat,
Main tumehin pyar karta tha, karta hu aur karta rahunga,
Bas tum hamesha ke liye meri ban jao aur kuch na chahu main us khuda se,
Bolo bhushan apni family se kab milwaye tujhe,

– Bhushan dhawan

Hindi Love Poem on Separation- प्यार की धड़कन

बिछड़ी प्यार की धड़कने
आँखों में नमी दे
बन्द राहों की उलझनें जीने न दे
वो खामोशियाँ भी इश्क़ को ही तलाशे
कुछ अनकही सी ख्वाइशें
दिल तो छुपा दे ये मोहोब्बत
कैसा जो अंग अंग लुटा न दे……

-स्वेता

Bichadi pyaar ki dhadkaney
Aankhon mein nami de
Bandh raahon ki uljhan Jeene na de
Vo khamoshiyaan bhi Ishq ko hi talashe
Kuch ankahi si khwaahishey
Dil ne chupa de Yeh mohobbat
kaisa Jo ang ang luta na de

-Swetha

Miss You Love Poem- याद है

 

याद है मुझे आज भी उनसे
मेरी पहली मुलकात का वो सफर
था वो बड़ा ही खास दिन मेरे लिये
था वो सफर लम्बा पर सुनकर
उनकी मीठी आवाज कर दिया
सफर मेरा सुकून भरा
मेरे सफर की पूरी थकान उतर गई
जब उसने मुस्कुरा के मुझे देखा याद है
मुझे मेरी नयी ज़िंदगी की नई शुरुआत
इसी ऐसी सफर से मिली वो सफर
सिर्फ एक सफ़र नहीं बल्कि
मेरी ज़िन्दगी की नयी ख़ूबसूरत सूरत थी
याद है मुझे आज भी उसने
हमारी पहली मुलाक़ात का वो सफर

-भारत ठाकुर

Yaad hai mujhe aaj bhi unse
Meri pehli mulakat ka vo safar,
Tha vo bada hi khaas din mere liye,
Tha vo safar lamba par sunkaar
Unki mithi aavaaz kar diya
Safar mera sukun bhara
Mere safar ki puri thakaan utri gayi
Jab usne muskurake muje dekha yad hai…
Muje meri nai zindagi ki nai suruaat
Esi safar se mili.. vo safar
Ssirf ek safar nai balki
Meri jindgi ki nayi khubsurat suruat thi
Yaad hai muje aaj bhi usne
Hamari pehli mulakat ka vo safar
Kese baya karu apne vo jazbaat…
Meri mulakat ka vo safar…

-Bharat Thakor

Waiting for Love Hindi Poem-सुनहरा पल

हृदय की अनकही बातें कभी जब लब पर आती हैं
स्वरों में कम्पन होती है. स्वयं पलकें झुक जातीं हैं।

कहीं भी दिल नहीं लगता मिलन की तीस सताती है
कभी जब तन्हाई मे. किसी की याद आती है।

प्रात: खुशियों से भर जाती शाम अभिसार में जाती है
दिन उदास रहता है.रात मे नींद न आती है।

निगाहें चंचल हो जाती हैं नज़र चौखट पर रहती है
ख़्वाब की दुनिया सजती है अधर स्मित सी रहती है।

कभी जो संगम नहीं होता गात अलसाई रहती है
निगाहें चार होते ही…. सतत विलसाई रहती हैं।

रवि प्रकाश सिंह(नागपुर)

Hridaya ki ankahi baatein kabhi jab lab par aati hai
Sawaron me kampan hoti hai sway palke jhuk jati hai

Kahi bhi man nahi lagta milan ki tis satati hai
Kabhi jab tanhai mein kisi ki yaad aati hai

Pratah khushiyon se bhar jati sham abhisar mein jati hai
Din udas rhata hai raat mein neend naa ati hai

Nigahein chanchal ho jati hai nazar chaukhat par rahti hai
Khwab ki duniya sajti hai adhar smit si rahti hai

Kabhi jo sangam nahi hota ghaat alsai rahti hai
Nigahein char hote hi.. satat vilsai rahti hai

Ravi Parkash Sigh

Hindi Love Poem Expressing Love – दिल की इस दीवार पर

प्यार भरे शब्दों से कोई पैगाम लिखता हूँ।
तड़प कर जिया हूँ बरसों तक।
इस तड़प का कोई एहसास लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
हँसा था जो तूने मुझे देख प्यार से।
उन जादू भरी नजरों का अंदाज लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
नाम तेरा बेनाम है सावन का कोई पैगाम है।
बरसती हुई इन बूंदों में भीगा सी एक शाम है।
जीवन की हर शाम को आज तेरे नाम लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
मेरी हर तमन्ना अधूरी थी तुझे पाने से पहले।
इन तमन्नाओं को आज जीने की वजह लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
सीने में धड़कते दिल को तेरा खत मिल गया।
सायरो की भीड़ में एक सायर नया बन गया।
आज इसी सायरी को तेरे नाम लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
मैं कोई शायर नहीँ न तू मेरी कोई कल्पना है।
तू हकीकत है तू इबारत है तू ही इस दिल की इबादत है।
दिल में तेरी मोह्बत का कलमा बार बार पढता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
दुआओं की भीड़ है तेरे लिये बहुत सी।
मगर मेरी भी एक दुआ छोटी सी कबूल कर लेना ऐ खुदा।
उसको रखना सदा दिल के पास।
कैसे कहूँ तुझे दिल से आज खुदा लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
बस तेरा ही नाम लिखता हूँ।

-गौरव

Dil ki es diwar par tera naam likhta hoon
Pyar bhre shbdo se koi paigaam likhta hoon
Tadap kr jiya hu barso tak
Es tadap ka koi ehsas likhta hoon
Dil ki es diwar par tera naam likhta hoon
Hansa tha jo tune muje dekh pyar se
Un jadu bhari nazron ka andaaz likhta hoon
Dil ki es diwar par tera naam likhta h
Naam tera bennaam hai sawan ka koi paigaam hai
Barsti hue en bundo mein bhiga si ek sham hai
Jivan ki har shma ko aaj tere naam likhta hoon
Dil ki es diwar par tera naam likhta hoon
Meri har tamnna adhuri thi tujhe pane se pahle
En tamnnao ko aaj jine ki bajah likhta hoon
Dil ki es diwar par tera naam likhta hoon
Sine mein dhdkte dil ko tera khat mil gya
Shayron ki bheed me ek shayr nya ban gya
Aaj esi shayri ko tere naam likhta hoon
Mein koi shayar nahi na meri tu koi kalpana hai
Tu haqikat hai tu ebarat hai tu hi dil ki ebadat hai
Dil me teri muhabbat ka kalma bar bar padta hoon
Dil ki es diwar par tera naam likhta hoon
Duaao ki bheed hai tere liye bhut si
Magar meri bhi ek dua choti si kabool kar lena ae khuda
Usko rakhna sada dil ke paas
Kese kahu tujhe dil se aaj khuda likhta hoon
Dil ki es deewar par tera naam likhta hoon
Bas tera hi naam likhta hoon

-Gaurav

Hindi Love Poem on Pain-मैं तन्हा हूँ

मैं तन्हा हूँ मुझे तन्हा ही रहने दो
देखकर मेरे बहते आंसू
तुम अपने लहू न बहने दो
मैं आपका दीवाना हूँ
मुझे बस अपना पागल रहने दो
मिट गया जो सवेरा मेरा
अब कैसे खोजूं घर मैं तेरा
मुझे रोशनी से नफरत सी है
ए मेरे दोस्त तुम मुझे अब
चांदनी के काजल में रहने दो
वो किस्से क्या जो मुझे रुलाते रहें
वो सपने क्या जो मुझे जलाते रहें
अब मैं बेफिक्र सा हो गया हूँ
आप मुझे आबारा ही रहने दो
तेरी गलियों को भूल सा गया हूँ
मैं वो तेरी बातों को खो सा गया हूँ
मैं अब तुम भी मुस्कुराओ
जी भर के और मुझे भी
ज़िन्दगी बात करने दो।।

-अभी राजा फर्रुखाबादी

Main tanha hoon muje tanha hi rahne do
Dekhkar mere bahte aansu
Tum apna lahu na bahne do
Main aapka diwana hoon
Mujhe bas apna pagal rahne do
Mit gya jo swera mera
Ab kese khoju ghar main tera
Muje roshni se nafrat si hai
Aei mere dost mum mujhe
Chandani ke kajal mein rahne do
Wo kisse kya jo muje rulate rahe
Wo sapne kya jo muje jalate rahe
Ab main befikar sa ho gya hoon
Aap mujhe aawara hi rhne do
Teri galiyon ko bhul sa gya hoon
Main wo teri baaton ko kho sa gya hoon
Main ab tum bhi muskurao
Ji bhar ke aur mujhe bhi
Zingadi baat karne do

-Abhi Raja Farukhabadi

 

 

 

Hindi Love Poem For Her-जाने क्या रिश्ता है

जाने क्या रिश्ता है जाने क्या नाता है तुमसे
अनजाना सा एहसास है अनजानी सी राह है
जाने क्या चाहता है यह बावरा मन
इसकी लीला यही जाने
ना कहुँ तुझे चाँद का टुकड़ा
ना कहुँ तुझे मेरे लिये बनाया है
बस इतना कहुँ की तू जीने का सहारा है
जाने क्या रिश्ता है तुमसे जाने क्या नाता है
अनजानी सी राहों पर चलना
अनकही बातें महसूस करना
हर आहट में तुझे महसूस करना
शायद तुम्हे याद करने के तरीके बन गये है
तेरी आँखों की नमकीन मस्तियाँ क्यों घायल करे मुझे
इन एहसासों को कैसे बाँधू मैं
मैं खो जाऊँ तुम्हारी इन नशीली आँखों में
मैं फिर कहा जोर इस ज़माने को
जाने क्या रिश्ता है क्या नाता है तुमसे

-सोना

Jane kya rishta hai jane kya nata hai tumse
Anjana sa ehsas hai anjani si rahe hai
Jane kya chahta hai yeh bawra man
Iski leela yahi jane
Na khu tuje chand ka tukda
Na khu tuje mere liye banaya hai
Bs itna khu ki tu jine ka sahara hai
Jane kya rishta hai tumse jane kya nata hai
Anjani si raho par chalna
Ankahi baatein mehsus karna
Har aahat mai tumhe mehsus karna
Sayd tumhe yad krne ke tarike ban gye hai
Teri aankhon ki namkeen mastiyan kyu gayal kare muje
En ehsaso ko kese bandhu mai .
Mai kho jau tumhari in nashili aankho mai
Fir kha jaur is jamane ko
Jane kya rishta hai jane kya nata hai tumse..

-Sona

Hindi Love Poem for Her- एक लंबे वक्त के बाद

एक लंबे वक्त के बाद भी,
भुला न पाया तुम्हें..
न जाने कौन सा दिन था वो,
जब तुम्हारी आँखों ने डुबोया था मुझे..
हां, वही दिन था तब से ही
कोई रंग नहीं चढ़ता मुझपे,
न ही कोई एहसास भिगोता है अब मुझे..
‘गुड़िया”तुम मिलना कभी किसी,
ढलती शाम के सूरज तले..
वहीं बताऊँगा तुम्हें..
क्या क्या खोया है मैंने,
एक तुम्हें पाने के लिये….

– संस्कार जैन

Ek lambe waqt ke bad bhi
Bhula na paya tumhe na jane kon sa din tha wo
Jab tumhari aankhon ne duboya tha mujhe
Haan wahi din tha tab se hi
Ki rang nahi chadta mujhpe
Na hi koi ehsas bhigota hai ab mujhe
‘Gudiya’ tum milna kabhi kisi
Dhalti sham ke suraj tale
Wahi btauga tumhe
Kya kya khoya hai maine
Ek tumhe pane ke liye

-Sanskar Jain