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Hindi Love Poem-Kabhi Do Hamein Bhi Yah Mauka


कभी दो हमें भी यह मौका,
सजदे में तेरे झुक जाएं हम,
लेके हाथ तेरा हाथों में,
प्यार की चूड़ियाँ पहनाएं हम
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
ज़ुल्फों की छाँव में रहने का,
तेरे कानों में गुफ़्तगू कहने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
होठों से होठ मिलाने का,
तेरी बाहों में सो जाने का,
रात में तेरे ख्वाबों में जी लेने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
शाम के एहसास का,
गहरे से जज़्बात का,
आँखों में डूब जाने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
नज़्म में तुझको दिल दे जाने का,
ग़ज़ल में तेरे गीत गुनगुनाने का,
सुरों की ज़िन्दगी में तेरे शामिल हो जाने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
ज़िन्दगी की मुकम्मलता का,
दुल्हन बन के तुम्हारे घर आजाने का,
सुहाग की सेज पर हमको प्यार जताने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
सुबह आँख खुले तो तेरे दीदार का,
बाहों में सुलगते से जिस्म का,
मांग में तेरी सिन्दूर भर देने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,
खुदको जाता देने का,
अपना प्यार दिखने का,
कभी दो हमें भी यह मौका
-गौरव

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Hindi Love Poem-तुम सच्ची साथी


उठा लेखनी आज कुछ ऐसा काम कर रहा हूँ,
कुछ छन्द, हे जीवनसंगिनी ! तेरे नाम कर रहा हूँ ।

ऋतुओं में सबसे ऊपर ऋतुराज हो तुम,
कल और आज में, मेरा आज हो तुम।

पल-पल मेरा कितना ख्याल रखती हो,
संग-संग मात-पिता और बेटी की संभाल रखती हो।

लौट कर ना आऊं तो करती हो मेरा इंतज़ार,
ज़रा सी देर लगे तो, हाय ! वो आंसुओं की बौछार ।

तीज-त्यौहार-रस्म और सारे व्रत निभाती हो,
सब रिश्ते-नातों में, सुख-दुःख की तुम सच्ची साथी हो।

कवि ‘राज़’ लिख रहा हूँ ‘दीवाना’ खुद को,
वाह! क्या शौहर पाया है, ये कहेगा जमाना तुझको।

-राज़ सोरखी “दीवाना कवि”

Utha lakhani aaj kuch esa kam kar rha hoon
Kuch chhand, hei jivansangani tere nam kar rha hoon

Rituon me sabse upar rituraz ho tum
Kal aur aaj mein mera aaj ho tum

Pal pal mera kitna khyal rkhti ho
Sang sang maat pita aur beti ki sambhal rakhti ho

Laut kar na aau to krti ho mera intezar
Zra si deir lge to wo aansuon ki bochhar

Teez tyohar-rasam aur sare vrat nibhati ho
Sab rishte naton mein sukh dukh ki tum suchi sathi ho

Kavi raz likh rha hoon diwana khud ko
Waah kya shohar paya hai ye khega jmana tujhko

-Raj sorkhi”diwana kavi”

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Hindi Poem for Husband – मेहंदी तेरे नाम की


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तेरे नाम की मेहंदी सजाई मैंने हाथों में
तुझको छुपाया मैंने अपनी साँसों में
चढ़ा रंग गहरा तेरे प्यार का
उतार न पाऊँ, हुआ असर ऐसा तेरे प्यार का
लिखा है तेरा नाम मैंने अपने हथेली पर
मिटा सके न कोई उसे पानी से
दिल पे लिखा तेरा नाम
मिट न पाए किसी से

-कविता परमार

Tere naam ki mehendi sajai maine hatho mei
Tujhko chupaya maine apni sanso mei
Chadha Rang gehra tere pyar ka
Utaar na pau, hua asar aisa tere pyar ka
Likha hai tera nam maine apne hatheli par
Mita sake na koi use pani se
Dil pe likha tera naam
Mit na paaye kisi se

-Kavita Parmar

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Hindi Love Poem for Marriage – मैरिज ब्यूरो


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मैरिज ब्यूरो के फेर में, ज़िंदगी के दौर में
न जाने कहाँ आ गए। लगे रहे दूसरों की शादी कराने में,
खुद की शादी में देर हो गए
सोचा कैसा बनाऊँ में अपनी शादी का इश्तेहार
दूसरों की शादी का इश्तेहार बनाने वाले
खुद की शादी का इश्तेहार बनाने में फ़ेल हो गए।
दूसरों के लिए तो लिखता हूँ सुन्दर सुशील बधु चाहिए
खुद के लिए ही न जान पाया कैसा हमसफर चाहिए
मैरिज ब्यूरो में बीती शामें मैरिज ना करा पायीं
मिलाते मिलाते दूसरों के दिल,मेरा दिल ही न मिला पायीं
आज जब देखा चेहरा आईने में खुद का एक नया अक्स ही नजर आया।
खुद के ही अक्स ने हस् के कहा बेटा मैरिज ब्यूरो के फेर में
ज़िन्दगी के दौर में न जाने कहाँ आ गए।
लगे रहे दूसरों की शादी कराने में
खुद की शादी ही में देर हो गए।

गौरव

Marriage Bureau ke feir mein zindgi k dore mein
Na jane kha aa gye lge rhe dusron ki shadi krwane mein
Khud ki shadi me deir ho gye
Socha kesa bnaun mein apni shadi ka eshtehar
Dusro ki shadi ka esthaar bnane wale
Khud ki shadi ka eshtehar bnane me fail ho gye
Dusro k liye to likhta hu sundr sushil bdhu chahiye
Khud k liye hi na jan paya kesa hmsfer chahiye
Marriage bureau mein biti shamein marriage na krw pai
Khud ke hi aksh ne has k kha beta marriage bureau k feir me
Zindgi ke dore mein na jane kha aa gye
Lage rhe dusro ki shadi krwane
Khud ki shadi me deir ho gye

Gaurav