Hindi Love Poem on Midnight Romantic Thoughts-Raat Ki Khumari

रात की खुमारी 

मूक अँधेरी रात में
किसने छेड़ी बांसुरी की विरह तान 
कसमसाती हैं कलियाँ 
सनसनाते हैं कुछ गुमसुम अरमान 
बहती चपल बयार 
दिल का दुखड़ा कोई गुनगुनाती है 
साजन की याद में 
तड़पती विरहन कोई कुनमुनाती है 
चाँद है बरसाता 
नभमंडल से स्वेत अनुरागी कण 
धरा चूमती जिनको 
रसीले अधरों से हर-पल हर-क्षण
अप्सरा करती श्रृंगार 
थामकर हाथों में अलौकिक दर्पण 
झिलमिल तारे झूमकर 
करते शुभ बेला में यौवन अर्पण 
पारदर्शी हिम शिखर
आईनेदार दरख्तों पर खड़ी है
सफ़ेद आँचल तले 
उजली हिरे मोतियों से जड़ी है
मौन अमलतास की 
कोमल पत्तियाँ देखो चुलबुलाती हैं 
ओस की रेशमी बूंदें 
चांदनी की फुहार में कुलबुलाती हैं
भोर अभी आना मत 
मनभावन चांदनी अभी कुँवारी है
जवां है इक मधुशाला
बावली रात की अजीब खुमारी है 

-किशन नेगी ‘एकांत’

Hindi Love Poem on Separation- प्यार की धड़कन

बिछड़ी प्यार की धड़कने
आँखों में नमी दे
बन्द राहों की उलझनें जीने न दे
वो खामोशियाँ भी इश्क़ को ही तलाशे
कुछ अनकही सी ख्वाइशें
दिल तो छुपा दे ये मोहोब्बत
कैसा जो अंग अंग लुटा न दे……

-स्वेता

Bichadi pyaar ki dhadkaney
Aankhon mein nami de
Bandh raahon ki uljhan Jeene na de
Vo khamoshiyaan bhi Ishq ko hi talashe
Kuch ankahi si khwaahishey
Dil ne chupa de Yeh mohobbat
kaisa Jo ang ang luta na de

-Swetha

Hindi Love Poem on Separation-आँखें जो खुली

आँखें जो खुली तो उन्हें अपने करीब पाया ना था
कभी थे रूह में शामिल आज उनका साया ना था
बेपनाह मोहब्बत की जिनसे उम्मीदें लिये बैठे थे
उनसे तन्हाइयों की सौगातें मिलेंगी बताया ना था
एक हम ही कसीदे हुस्न के हर बार पढ़ते रहे पर
उसने तो कभी हाल-ए-दिल सुनाया ना था
वो फिरते रहे दिल में ना जाने कितने राज लिये
हमने तो कभी उनसे जज्बातों को छुपाया ना था
जाने क्यों हम बेवजह मदहोश हुआ करते थे
जाम आँखों से तो कभी उसने पिलाया ना था
मीलों कब्ज़ा कर बना रखा था सपनों का महल पर
उसने वो ख़्वाब कभी आँखों में सजाया ना था
धड़कन ‘मौन’ हुई अब एक आह की आवाज़ है
शिकवा क्या उनसे जिसने कभी अपना बनाया ना था

-अमित मिश्रा

Aankhein jo khuli thi to unhe apne kareeb paya naa tha
Kabhi they ruh mein shamil aaj unka saya naa tha
Bepanaah mohabbat ki jinse umid liye beithe they
Unse tanhai ki saugate milegi btaya naa tha
Ek hum hi kaside husan ke har baar padte rahe par
Unse to kabhi haal ae dil sunaya naa tha
Wo firte rahe dil me naa jane kitne raaz liye
Hamne to kabhi unse jazbaton ko chupaya naa tha
Jane kyon hum bevajah madhosh hua karte they
Jaam aankhon se to kabhi usne pilaya na tha
Milon kabza kar bana rakha tha sapno ka mahal par
Usne wo khwab kabhi aankhon me sajaya na tha
Dhadkan maun hue ab ek aah ki aawaz hai
Shikwa kya unse jisne kabhi apna banaya naa tha

-Amit Mishra

Hindi Love Poem on Separation-आखिरी मुलाकात

काश दिल की बात दिल में ही रह जाती
तब ये दुनिया तेरे मेरे बीच ना आती
तब ना होती ये दूरियां और ना ही कोई खामोशी
बस तु अनजान होकर भी अनजाना ना होता
तब अगर हो जाती मुलाकात तो
मुस्कुराने का एक बहाना भी होता
ख्यालों में ही सही पर तेरे पास होने का
एहसास तो होता काश तब दिल की बात
दिल में ही रह जाती तब तेरे दूर होने का
कोई गम ना होता और ना होती
कोई आखिरी मुलाकात

-अनन्या

Kash dil ki baat dil me hi rah jati
Tab yeh duniya tere mere bich na aati
Tab na hoti yeh duriya aur na hi koi khamoshi
Bas tu anjan hokar bhi anjana n hota
Tab agar ho jati mulakat to
Muskurane ka ek bhana bhi hota
Khayalo me hi sahi pr tere pas hone ka
Ehsas to hota kash tab dil ki baat
Dil me hi rah jati tab tere dur hone ka
Koi gam na hota aur na hoti
Koi aakhiri mulakat

-Ananya

Hindi Love Poem Expressing Love-मेरी बात

आज फिर हमारी नज़रे मिली
वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी
उसके होठों की हसी मुझे बहाने लगी
मुझे लगा की आज अपने दिल की बात कह दूंगा
जो होगा उसे सच मान आगे बढ़ लूँगा
मगर उसे किसी और से प्यार था
वो तो किसी और पे मरती थी और
मैं उसके लिये सिर्फ उसका एक यार था
मेरे दिल में उसके लिये सिर्फ और सिर्फ प्यार था
इसलिये मेरी हिम्मत फिर से हार गयी
उससे अपने दिल की बात कहने की
अपने दिल के जज़्बात कहने की
वो खवाहिश फिर से खत्म कर दी
ये दिल की फ़रमाइश पूरी ना हो सकी और
फिर से मेरी बात अधूरी रह  गयी

– मनोहर मिश्रा

Aaj fir humari nazare mili
Vo mujhe dekhkar muskurane lagi
Uske hotho ki hasi mujhe bhane lagi
Mujhe laga ki aaj apne dil ki baat keh dunga
Jo hoga usse sach maan aage badh lunga
Magar usse kisi or se pyar tha
Vo to kisi or pe marti thi or
Mai uske lye sirf uska ek yaar tha
Mere dil me uske lye sirf or sirf pyar tha
Islye meri himmat fir se haar gayi
Usse apne dil ki baat kehne ki
Apne dil ke jazbaat kehne ki
Vo khawahish fir se khatm kar di
Ye dil ki farmaish puri na ho saki Or
Phir se meri baat adhuri reh gayi

-Manohar Mishra

 

Miss You Love Poem-याद जब भी उसकी आती है

याद जब भी उसकी आती है रातों की नींद उड़ ही जाती हैं
मेरे दिल का हाल ना पूछो प्यारे आशिकी ऐसे ही होती है
तेरे खोने का गम है मुझको तेरी यादें बहुत सताती हैं
याद जब भी उसकी आती है तूने धोखा दिया
वह बेवफा तेरी यादें मुझे रुलाती हैं तेरे इश्क में पागल था
मैं तेरी यादें मुझे तड़पाती हैं याद जब भी उसकी याद आती है
तू तो कहती थी की उम्र भर में साथ हूं फिर यह कैसी जुदाई है
धोखा दिया तूने हमको क्या यही आशिकी कहलाती है
याद जब भी उसकी याद आती है रातों की नींद उड़ ही जाती ।

– चंद्रभान सिंह

Yaad jab bhi uski aati hai to raaton ki neend ud jati hai
Mere dil ka haal na phucho pyare aashiqi ese hi hoti hai
Tere khone ka gam hai mujhko teri yaad bhut satati hai
Yaad jab bhi uski aati hai tune dokha diya
Ve bewafa teri yaadein muje rulati hai tere ishq me pagal tha
Main teri yaadein muje tadpati hai yaad jab bhi uski yaad aati hai
Tu to kahti thi ki umar bhar main sath hoon fir ye kaisi judai hai
Dokha diya tune hamko kya yahi ashiqi kehlati hai
Yaad jab bh uski yaad aati hai raaton ki neend ud jati hai

Chanderbhan Singh

Hindi love poem on separation-जीवन जीना हो तो

जीवन जीना हो तो कुछ तो खोना ही पड़ेगा,
चाह कर भी किसी को खोना ही पड़ेगा,
मिलना ना मिलना तो तकदीर का खेल है।
अपनी तक़दीर ही समझ कर खुद को समझना ही पड़ेगा।
कुछ तो कमी रही है जो ये सजा मिली है।
दिल मे हा है और ना चाहते हुए भी हमे ना ही मिली है।
कुसूर ना तुम्हरा है ना मेरा है मेरे यार।
बस बात इतनी सी है कि।।।।
जीवन जीना हो तो कुछ तो खोना ही पड़ेगा,
चाह कर भी किसी को खोना ही पड़ेगा।।।।

-नंदनी 

Jeevan jeena hai to kuch to khona hi padega
Chah kar bhi kisi ko khona hi padega
Milna na milna to takdeer ka khel hai
Apni takdeer hi samajh kar khud ko samjhna hi padega
Kuch to kami rahi hai jo ye saza mili hai
Dil mein haan hai aur na chahte hue bhi hamein na hi mili hai
Kasoor na tumhara hai na mera hai mere yar
Bas baat itni si hai ki
Jeevan jeena hai to kuch to khona hi padega
Chah kar bhi kisi ko khona hi padega

-Nandani

Hindi Love Poem on Separation -तेरा सहारा है

नहीं होता है एहसास किसी को किसी के दिल के दर्द का
क्यों करता है ग़ुनाह की किसी के दिल को दुखाने का

क्यूँ ये दर्द इतना इतना गहरा है
फिर भी इसमें ना कोई पहरा है

मैंने तो मौत को करीब से देखा है
फिर भी वक़्त मेरे इंतज़ार में ठहरा है

क्यों नहीं समझता है कोई अपना अपनों के दिल के दर्द को
वो अपने ही क्या जो किसी अपने के दिल को दुखा के किसी गैर के पास जाके ठहरा है

नहीं होता है बर्दास्त ये जानकर
कि मेरा अपना हो गया पराया है

क्यों छीन लेता है कोई किसी की खुशियों को
क्या भगवन के घर अँधेरा है

कौन हूँ मैं क्या है मेरी पहचान
क्या इस दर्द का नहीं कोई किनारा है

मेरा तो घर परिवार भी अपना नहीं रहा
अब तो बस एक तेरा ही सहारा है

तुम भी चले गये अगर मुझसे दूर
मैं कैसे कहूँगी की ये रिश्ता हमारा है

कसम है रब की ये जिस्म क्या
ये जान ये दिल तुम्हारा है

-पूनम

Nahi hota hai ehsas kisi ko kisi ke dil ke dard ka,
Kyun karta hai gunah koi kisi ke dil ko dukhane ka,

Kyun ye dard itna gehra hai,
Fir bhi ismein na koi pehra hai.

Maine to maut ko karib se dekha hai,
Fir bhi waqt mere intzar me thehra hai.

Kyun nahi samajhta hai koi apna apnon ke dil ke dard ko,
Wo apne hi kya jo kisi apne ke dil ko dhukha ke kisi gair ke paas jake thehra hai.

Nahi hota hai bardasht ye jaankar
ki ab mera apna ho gaya paraya hai.

Kyun chhin leta hai koi kisi ki khushiyo ko,
Kya Bhagwan ke ghar aandhera hai.

Kaun hun main kya hai meri pehchan,
Kya is dard ka nahi koi kinara hai.

Mera to ghar parivar bhi aapna nahi raha,
Ab to bus ek tera hi sahara hai.

Tum bhi chale gaye agar mujhse dur,
Main kaise kahungi ki ye rishta humara hai.

Kasam hai rab ki ye jism kya
Ye jaan, ye dil tumhara hai

– Punam

Sad Hindi Love Poems- गम-ए-महफ़िल


गम-ए-महफ़िल मे रुतबा हमारा और था
आशिकों की भीड़ मे रुतबा हमारा और था
फख्त हर वक्त आरजु उनकी बस दिल्लगी थी
कैसे समझाते ‘साहिल’, लिये तिरे जज्बा हमारा और था।
यू तो कई शख्सियते,शहर मे रूबरू थी
कुछ ख्वाहिशे तो,कुछ को पाने की आरजु थी
हर दफ़ा किसी बहाने नजरे चुरा ही लेते हम
पर इस दफा न जाने,वो चेहरा नुराना और था॥

– साहिल

Gum a mahfil mein rutba hamara aur tha.
Aashikon ki bheed me rutwa hmara aur tha
Faqkat har waqt aarju unki bus dillaggi thi
Kese samjhate sahil
Liye tere jazbba hamara aur tha
Yoon to skhsiyatein sher me ru b ru thi
Kuch khwaishe to kuch ko pane ki aarju thi
Har dfa kisi bhane nazre chura hi lete hum
Par es dafa na jane wo chehra nurana aur tha

Sahil