Hindi Poem Expressing Love-Kuch Kaho To Sahi

कुछ कहो तो सही

एक अजनबी तुम एक अजनबी हम
अनजानी राहों में मिल जाएंगे
कुछ कहो तो सही
गर बात होगी, तो तनहा न ये रात होगी
ये खामोश लब खुद-ब-खुद मुस्कुरायेंगे
कुछ कहो तो सही
गमों को उतार इन एहसासों में डूबकर तो देखो
ज़ख्म खुद-ब-खुद भर जाएंगे
कुछ कहो तो सही
हाथों में हाथ होगा, एक-दूजे का साथ होगा
ये दृग-मेघ खुद-ब-खुद बरस जाएंगे
कुछ कहो तो सही
वक्त के उन क्रूर पलों को बिसार दो
कुछ इबादत तुम्हारी कुछ दुआ हमारी रंग लाएंगे
कुछ कहो तो सही
ये असहज मौन न साधो
क्या भरोसा इन लम्हों का कब बिछड़ जाएंगे
कुछ कहो तो सही ।

-ज्योति आशुकृषणा

Hindi Love Poem for Her-Hawa Ke Jhonke

हवा के झोंके
मैंने सांस ली अपनी छत से…एक झोंके से वो उड़ चली
तू थी कहीं मीलों दूर अपनी छत पे…तेरी भी सांसें उड़ चली
मैंने सोचा कि मिलना तो ना था हमारे मुक़ददर में लिखा
मगर….
कहीं ना कहीं वह हवाएं जाती होंगी
जहां हमारे सांसें टकराती होंगी…
जो कुछ हम कह न सके कभी
वह मिलके अपनी दास्तान सुनाती होंगी ।
आयुष पांडे

Hindi Love Poem – Veh Pal

‘वह पल’

सालों का इंतज़ार एक पल बनके खड़ा था

चाह तो थी कुछ और लेकिन समय विपरीत ही चल पड़ा था ।।

पल की नज़दीकी क्षणिक और थी

समय का चक्र भी मानो स्थल सा पड़ा था ।।

आते ही उसके मैं समझ से बाहर खड़ा था

मानो किसी बंजर जमीन को पानी का स्पर्श मिला था ।।

चाहता तो था उसे रोकना पर इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में

खुद को साबित करना अभी बाकी बचा था ।।

-सुमित रघुवंशी

How to read:

Vah Pal

Salo ka intzar ek pal banke khada tha

Chah to thi kuch aur lekin samay vipreet hi chal pada tha

Pal ki nazdeeki shanik aur thi

Samay ka chakra bhi mano sthal sa pada tha

Aate hi uske mai samajh se bahar khada tha

Maano kisi banjar zameen ko paani ka sparsh mila tha

Chahta to tha usey rokna par is bhag-daud bhari zindagi mei

Khud ko sabit karna abhi baaki bacha tha.

-Sumit Raghuvanshi

Hindi Love Poem on Midnight Romantic Thoughts-Raat Ki Khumari

रात की खुमारी 

मूक अँधेरी रात में
किसने छेड़ी बांसुरी की विरह तान 
कसमसाती हैं कलियाँ 
सनसनाते हैं कुछ गुमसुम अरमान 
बहती चपल बयार 
दिल का दुखड़ा कोई गुनगुनाती है 
साजन की याद में 
तड़पती विरहन कोई कुनमुनाती है 
चाँद है बरसाता 
नभमंडल से स्वेत अनुरागी कण 
धरा चूमती जिनको 
रसीले अधरों से हर-पल हर-क्षण
अप्सरा करती श्रृंगार 
थामकर हाथों में अलौकिक दर्पण 
झिलमिल तारे झूमकर 
करते शुभ बेला में यौवन अर्पण 
पारदर्शी हिम शिखर
आईनेदार दरख्तों पर खड़ी है
सफ़ेद आँचल तले 
उजली हिरे मोतियों से जड़ी है
मौन अमलतास की 
कोमल पत्तियाँ देखो चुलबुलाती हैं 
ओस की रेशमी बूंदें 
चांदनी की फुहार में कुलबुलाती हैं
भोर अभी आना मत 
मनभावन चांदनी अभी कुँवारी है
जवां है इक मधुशाला
बावली रात की अजीब खुमारी है 

-किशन नेगी ‘एकांत’

Longing for Love Poem – Kash Kash

काश…काश…

कहने की हैं बातें
डरता हूँ
जब सोता हूँ रातें
सोचता हूँ

काश हम मिलें
कुछ बोलें
दर्द सिले
कुछ न टोले

चाहता नहीं हूँ
पर चाहता भी हूँ
क्यों यह रिश्ता
नहीं जाता बरिस्ता

चलो कुछ लम्हों के लिए
बन जाओ मेरे लिए
मैं रहूँ तुम्हारी बाहों में
और तुम मेरी सांसों में

काश …काश …

-रोहन भरद्वाज

Waiting for Love Hindi Poem-सुनहरा पल

हृदय की अनकही बातें कभी जब लब पर आती हैं
स्वरों में कम्पन होती है. स्वयं पलकें झुक जातीं हैं।

कहीं भी दिल नहीं लगता मिलन की तीस सताती है
कभी जब तन्हाई मे. किसी की याद आती है।

प्रात: खुशियों से भर जाती शाम अभिसार में जाती है
दिन उदास रहता है.रात मे नींद न आती है।

निगाहें चंचल हो जाती हैं नज़र चौखट पर रहती है
ख़्वाब की दुनिया सजती है अधर स्मित सी रहती है।

कभी जो संगम नहीं होता गात अलसाई रहती है
निगाहें चार होते ही…. सतत विलसाई रहती हैं।

रवि प्रकाश सिंह(नागपुर)

Hridaya ki ankahi baatein kabhi jab lab par aati hai
Sawaron me kampan hoti hai sway palke jhuk jati hai

Kahi bhi man nahi lagta milan ki tis satati hai
Kabhi jab tanhai mein kisi ki yaad aati hai

Pratah khushiyon se bhar jati sham abhisar mein jati hai
Din udas rhata hai raat mein neend naa ati hai

Nigahein chanchal ho jati hai nazar chaukhat par rahti hai
Khwab ki duniya sajti hai adhar smit si rahti hai

Kabhi jo sangam nahi hota ghaat alsai rahti hai
Nigahein char hote hi.. satat vilsai rahti hai

Ravi Parkash Sigh

Hindi Poem Longing for Love – आखरी ख्वाहिश

 

इस ज़िन्दगी का खूबसूरत सपना हो तुम
कह सके ये दिल जिसे अपना वो हो तुम
पतझड़ सी ज़िन्दगी में आई हसीन बहार हो तुम
इस जीवन रूपी गर्मी की ठण्डी फुहार  हो तुम
सर पर चढ़ता हुआ जूनून हो तुम
इस दिल को राहत देने वाला सुकून हो तुम
रब की करी हुई दिलक़श  साज़िश हो तुम
मेरी ज़िन्दगी की अब आखरी  ख्वाहिश हो तुम

– मोनिका मखारिया

Is zindagi ka khoobsurat sapna ho tum
Kah sake ye dil jise apna wo ho tum
Patjhad si jindagi me Aayi haseen bahaar ho tum
Is jeevan roopi garmi ki thandi phuhaar ho tum
Sar par chadhata hua junoon ho tum
Is dil ko raahat dene wala sukoon ho tum
Rab ki kari hui dilkash saazish ho tum
Meri zindagi ki ab Akhari khvahish ho tum

-Monika Makharia

 

 

Hindi Love Poem for Him -क्या पता है तुझे

क्या पता है तुझे
कि मेरे जज्बातों का अलफ़ाज़ तू है
मेरे होंठो पर बिखरी मुस्कराहट की आवाज़ तू है
मेरे चेहरे की मासूमियत में छिपी हर राज़ तू है
मेरे नयनों के आशियाने में कैद मेरे सुकून हमराज़ तू है
सुरमयी काजल से सजी खूबसूरत पलकों का नाज़ तू है
बेखबर झूम कर चलने वाले कदमों की बलखाती अंदाज तू है
सोये हुऐ मुहब्बत के मीठी सुरों वाली आगाज़ तू है
अब और क्या बताऊँ कि तू क्या क्या है मेरा?
बस जान ले तू इतना कि मेरे सोलह श्रृंगार की लाज तू है

-संघमित्रा मौर्य

Kya pta hai tujhe?
ki mere jajbaato ka alfaaj tu hai,
mere hontho par bikhari muskurahat ki awaj hai,
mere chahre ki masoomiyat me chhipi har raaj tu hai,
mere nayano ke aashiyaane me kaid mere sukoon ka hamraaj tu hai,
surmayi kajal se saji khoobsoorat palko ki naaj tu hai,
bekhabar jhoom kar chalne wale kadmo ki balkhaati andaaj tu hai,
soye huye mohabbat ke mithi suro wali agaaj tu hai,
ab aur kya btaoo ki tu kya – kya hai mera ??,,
bas jan le tu itna ki mere solah shringaar ki laaj tu hai..

-Sanghmitra Maurya

Waiting for love Hindi Poem – इंतज़ार

दिल तेरा हर पल इंतज़ार कर रहा है
ये तेरा हाल जानने के लिये हर पल मर रहा है
उसे नहीं पता तू मेरे बारे में सोच रहा होगा कि नहीं
पर हर घड़ी वो तुझे ही याद कर रहा है
तू कहाँ है इस दिल को नहीं पता
तू कब मिलेगा इस दिल को नहीं पता
हर घड़ी ये अपने अंदर तुझे ढूंढ के देख रहा अगर मिल जाये तो क्या पता
तेरा पता इस दिल को है नहीं
पर ढूंढ़ने ऐसे अगर मिल जाये तू कहीं
ढूंढ़ने को कुछ भी ये फिर जान की भी परवाह नहीं
तुझे चाहती हूँ या नहीं , नहीं पता
क्यू सिर्फ तुम ही नहीं पता
मिल जाओ तुम बस दिल चाहता है एक बार गले लग जा भले फिर हो जाऊगी लापता
ना मिलूँगी तुम्हे फिर अगर तुम न चाहो
चली जाऊँगी  ज़िंदगी से तुम्हारी बस तुम दिल से कहो है प्यार तुझे भी मुझे है पता
बोल दो. फिर ये पल. कल हो ना हो

-राम चंदानी

Dil tera har pal intezaar kar raha hai
ye tera haal jaan ne ke liye har pal mar raha hai
use nahi pata tu mere baare mein soch raha hoga ki nahi
par har gadhi vo tujhe hi yaad kar raha hai…
Tu kahan hai is dil ko nahi pata
tu kab milega is dil ko nahi pata
har ghadi ye apne andar tujhe dhun ke dekh raha agar mil jaye to kya pata.
Tera pata is dil ko hai nahi
par dhoonde aise agar mil jaye tu kahi
dhhondne ko kuch bhi karega ye fir jaan ki bhi parwaah nahi
Tujhe chahti hun ya nahi, nahi pata
kyun sirf tum hi nahi pata
mil jao tum bas dil chahta hai ek baar gale lag jaa bhale fir ho jaungi laapata..
Na milungi tumhe fir agar tum na chaho
chale jaungi zindagi se tumhari bas tum dil se kaho hai pyaar tujhe bhi mujhe hai pata
bol do… phir ye pal….. kal ho na ho… 

-Ram Chandani