सब जगह तू नहीं तो तेरा नाम है

सब जगह तू नहीं तो तेरा नाम है
क्या कहें तेरा आशिक क्यों बदनाम है
दिल से निकलती है तेरे लिए सिर्फ दुआ
तू क्या जाने तूने दिल को  कैसे है छुआ
अब तो तेरे प्यार में है जीना सिर्फ जीना
ये आशिकी का जाम हमने भी पीना
तू आजाये अगर महफ़िल में तो है बहार
वरना फूलों की बहार भी है बेकार
और क्या कहूँ तेरी तारीफ में ओ ज़ालिम
कैसे करता है तू बिना खंज़र के क़त्ल-ऐ-रहम

One thought on “सब जगह तू नहीं तो तेरा नाम है

  1. Tere pahle Sbko apna mane…
    Pr tere jaisa ehsaas kisi ke liye na tha…
    Jab najre tmse mili to…Rabba kasam..
    Mere jine ki wajah ban gya tu…
    Besak tujhe mujh pr yakin na Ho…
    Pr Zindagy se v pyara ban gya tu…
    Jha rab sbki murad puri krte hai..
    Sachche dilo ko milate hai…
    Yakin kr wha v maine sirf tujhe hi mangi hai…
    Tere dil me mai hu v ya nhi mujhe malum nhi..
    Pr mere jism ke jarre jarre tera nam pukare…Mai tmhare bina ji nhi skti…
    Bichhar gai jis din tmse…mai khud ko mita dungy….Miss u babu…
    LADo…

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