Amazing, best original Hindi love poems, Hindi shayari on love and romance, romantic Hindi poetry and Hindi prem kavita|हिंदी प्रेम कविता संग्रह और शायरी
कभी दो हमें भी यह मौका, सजदे में तेरे झुक जाएं हम, लेके हाथ तेरा हाथों में, प्यार की चूड़ियाँ पहनाएं हम कभी दो हमें भी यह मौका,
कभी दो हमें भी यह मौका, ज़ुल्फों की छाँव में रहने का, तेरे कानों में गुफ़्तगू कहने का, कभी दो हमें भी यह मौका,
कभी दो हमें भी यह मौका, होठों से होठ मिलाने का, तेरी बाहों में सो जाने का, रात में तेरे ख्वाबों में जी लेने का, कभी दो हमें भी यह मौका,
कभी दो हमें भी यह मौका, शाम के एहसास का, गहरे से जज़्बात का, आँखों में डूब जाने का, कभी दो हमें भी यह मौका,
कभी दो हमें भी यह मौका,
नज़्म में तुझको दिल दे जाने का,
ग़ज़ल में तेरे गीत गुनगुनाने का,
सुरों की ज़िन्दगी में तेरे शामिल हो जाने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,
कभी दो हमें भी यह मौका, ज़िन्दगी की मुकम्मलता का, दुल्हन बन के तुम्हारे घर आजाने का, सुहाग की सेज पर हमको प्यार जताने का, कभी दो हमें भी यह मौका,
कभी दो हमें भी यह मौका, सुबह आँख खुले तो तेरे दीदार का, बाहों में सुलगते से जिस्म का, मांग में तेरी सिन्दूर भर देने का, कभी दो हमें भी यह मौका, खुदको जाता देने का, अपना प्यार दिखने का, कभी दो हमें भी यह मौका -गौरव
लिख न सके बहुत कुछ सोचा पर कम लिखूं कभी आप कभी मैं कभी हम लिखूं आप का प्यार लिखूं आप की वफा लिखूं आप की शरमो हया लिखूं आप की बातें लिखूं आप के साथ बितायी हसीन रात लिखूं अब आप ही बताइए कि मैं क्या लिखूं -नेहा चौधरी
समय मिले तो आकर मिलना लाइब्रेरी की टेबल पर, कुछ न बोलेंगें हम ज़ुबाँ से और अटकेंगे किताबों पर, पलटेंगे पेजों को यूँ हीं लफ्ज़ सुनेंगें हज़ारों पर, लिखे हुए लैटर का क्या करना ? जज़्बात पढ़ेंगे आँखों पर, दांतों तले कभी होंठ दबाते मुस्कान छुपायेंगे होंठों पर, समय मिले तो आकर मिलना, लाइब्रेरी की टेबल पर।
(इस कविता के रचनाकार के सम्बन्ध में विवाद होने के कारण कवि का नाम हटा दिया गया है )
बहुत समझाया है मैने इस दिल को
पर अब ये मेरी सुनता नहीं
हर धड़कन में अब तुम हो बसे
कि ये सपना कोई बुनता नहीं
तुम अब मेरे नही हो सकते ये दिल भी जानता है
पर इस दिल का क्या कसूर ये तो तुझे ही खुदा मानता है
तुम कहते हो जीवन में आगे बढ़ो सब ठीक होगा
लेकिन तुम्हें भी पता है कि तुम्हारी तरह कोई मुझे समझ सकता नहीं
बहुत समझाया है मैने इस दिल को
पर अब ये मेरी सुनता नहीं
भले ही ऊपरवाले ने हमारी जोड़ी ना बनाई हो
लेकिन इस जीवन में कुछ पल ही सही तेरे होने का एहसास हुआ , इससे बड़ी क्या खुदाई हो
बस दुआ है यही रब से…….
जब जिंदगी दे तो तेरे साथ नही तो जिंदगी ना दें
बहुत समझाया है मैने इस दिल को
पर अब ये मेरी सुनता नही
ऐ मेरे हमदम मुझपर एक और एहसान कर
आखिरी ख्वाहिश है दिल की यही समझकर
मेरा दिल तो रौशन है बस तेरे ही होने से
इसलिए इस दिल में तुम कभी अंधेरा करना नही
बहुत समझाया है मैने इस दिल को
पर अब ये मेरी सुनता नहीं
-प्रशांत आयुष वर्मा
Ab Dil Ye Meri Sunta Nahi
Bahut samjhaya hai maine is dil ko Par ab ye meri sunta nahi Har dhadakan mein ab tum ho base Ki ye sapna koi bunta nahin Tum ab mere nahin ho sakate ye dil bhee jaanata hai Par is dil ka kya kasoor ye to tujhe hee khuda maanata hai Tum kehte ho jeevan mein aage badho sab theek hoga Lekin tumhein bhee pata hai ki tumhaaree tarah koee mujhe samajh sakata nahi Bahut samjhaya hai maine is dil ko Par ab ye meri sunta nahi Bhale hee uparavaale ne hamaaree jodee na banaee ho Lekin ye jeevan mein kuchh pal hee sahee tumhaara hone ka ehasaas hua,
Isse badi kya khudai ho Bas dua hai yahi rab se ……. Jab jindagi de to tere saath nahin to jindagi na den bahut samjhaya hai maine is dil ko Par ab ye meri sunta nahi Ae mere hamadam mujhapar ek aur ahasaan kar Aakhri khvaahish hai dil kee yahee samajhakar Mera dil to raushan hai bas tumhaara hee hone se Isiliye is dil mein tum kabhee andhera karana nahin Bahut samjhaya hai maine is dil ko Par ab ye meri sunta nahi
-Prashant Aayush Verma
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आरज़ू
शून्य घोर चित्त चंचल में एक दबी है आरज़ू,
तुम्हारी रोज़ की तकरार की आरज़ू,
हमारी भीनी अनदेखी, मुस्कुराहट की आरज़ू,
मेरी भीतर गुज़रती हर कसक की आरज़ू,
तुम रुस्वाई की बात करते हो,
तो समन्दर सी अश्कों से ढलने वाली आरज़ू,
लगता है उधार दी है मैंने तुम्हैं सांसे अपनी,
इन अधूरी सांसो में कटती जिदंगी की आरज़ू,
इतंजार, उम्मीदें और अहसास सब बिखरा सा है,
टूटती निगाहों में लुटती पनाह की आरज़ू,
आखिरी बार जब तुम कहते हो!! ना रहा कुछ,
तो निर्धन सी, यादों की धनी होने की आरज़ू,
अनजान से पहचान का लम्बा सफर गुज़रा,
अब पहचान से अपनेपन की आरज़ू,
तुम जीवन की मांग करते हो,
मेरी तुम संग जीकर मरने की आरज़ू,
ज़माना क्या कहता है!!!!
ना खबर मुझे!! खबरहीन बेसुध,
मेरे इकरार और तुम्हारे इनकार की आरज़ू!!!!!! डाॅ. अवन्तिका
हम सारे वादों को निभाएंगे, जिंदगी को सफल बनाएंगे, तुम जो संग बने रहो, तुम वादा करके मुकर ना जाना, मेरे दर्द प्रार्थनाओं को खोरी-कोटी ना सुनाना, फिर भी तुमसे किया वादा निभाउंगा, तुम जो संग बने रहो। तुम्हारे कारण हर चाहत से इज़हार है मेरा, तुम्हारे कारण हर जीत से प्यार है मेरा, मेरा सीरत ये बढ़ता रहेगा, तुम जो संग बने रहो। कल को कायनात बदल दूंगा, हर हार को जीत लूंगा, हर कोशिश वो बार बार करुंगा, तुम जो संग बने रहो। तुम्हारे हँसी सपनों के लिए, तुम्हारे हैसी अपनो के लिए, हर एक से मतलबी हो जाऊ, तुम जो संग बने रहो।
-राम
Hum sare waadon ko nibhayenge Zindagi ko safal banayenge Tum jo sang bane raho Tum wada Karke mukar na jana Mere achche prayas ko khari-koti na sunana Phir bhi Tumse kiya wada nibhaunga Tum jo sang bane raho Tumhare karan har chahat se izhaar hai mera Tumhare karan har jeet se pyar hai mera Mera seerat ye badhta rahega Tum jo sang bane raho Kal ko kayanat badal dunga Har haar ko jeet lunga Har koshish wo bar bar Karunga Tum jo sang bane raho Tumhare hasi sapnon ke liye Tumhare hasi apno ke liye Har ek se matlabi ho jaun Tum jo sang bane raho.