तेरे सिवा और भी गम हैं ज़माने में
तेरा आशिक़ हूँ अजनबी कहे भले तू बताने में
सदियाँ लगती हैं तेरे बिना वक़्त बिताने में
तेरा दीदार हो जाये तो वक़्त नहीं लगता कयामत आने में
कभी मुझे भी पिला दे अपनी आँखों के मैखाने में
डूब जाऊँ मैं ऐसे कि बरसों लगें होश में आने में
बहुत चल लिया मुसाफिर मुहब्बत की मंज़िल पाने में
जान ना निकल जाये जान के इंतज़ार है जान के आने में
-अनुष्का सूरी





