
Hindi love Poem on Separation-बिरह

Hindi Love Poems| प्रेम कविता |Romantic Poems|Prem Kavita
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मैं तेरे चहरे को पढ़ना चाहता हूँ किताब की तरह
तेरे साथ बीते हुए हर लम्हे को पिरोना चाहता हूँ ख्वाब की तरह
मैं जानता हूँ नहीं मिल सकता हूँ तुमको हर रोज़..
इसलिये ख्वाबों में आके गले लगाना चाहता हूँ मीठे एहसास की तरह.
गले मिलता हूँ जब मैं तो आँखें मेरी नॅम हो जाती हैं
भीगी हुई पलकों से लिपट के रोना चाहता हूँ तेरी याद की तरह..
चंद पल जब रह जाते हैं सवेरा होने में..जी भर के रोना चाहता हूँ
एक बार गले लगा लेना चाहता हूँ इस रात के खूबसूरत एहसास की तरह
–गौरव

ये दिल कितना पागल है हर पल तेरे ही ख्वाब ये बुनता हैरहता है मेरे सीने में धड़कन पर तेरी ही सुनता हैकभी अकेले में हंसता हैकभी सामने रखी तेरी तस्वीर से हज़ारों बातें करता हैये दिल को ना जाने क्या हो गया हैकभी गुदगुदाके तेरे खयालों को याद दिलाता हैकभी सटा के तुझको छेड़ता हैकभी प्यार से मनाके गले लगता हैये दिल को ना जाने क्या हो गया हैकभी ख्वाहिशों के महल बनता हैरहता है उसमें तेरे साथ प्यार के हज़ारो गीत वो दीवाना दिल तेरे लिये गाता हैये दिल जैसा भी है नटखट है शैतान हैतेरा है तुझसे प्यार करता हैये दिल कितना पागल है हर पल तेरे ही ख्वाब ये बुनता है
-गौरव

नहीं देखता उनके जिस्म की सुंदरता उनकी रूह में बस जाना चाहता हूँ
करके बेपनाह प्यार उन्हें उनके दिल से चुरा लेना चाहता हूँ
वो कहते हैं दूरियां हैं जिस्मों की हम कहते हैं बेपनाह प्यार है
भले ही दूर हैं तेरे जिस्म से पर तेरे हुस्न की सादगी के बहुत पास हैं
ना समझना ये प्यार है इस जन्म का ये प्यार तो है बरसों के एहसासों का
हर बार जन्म लेते हैं तुझे पाने के लिये पर कभी तुझे ना पा पते हैं
बस रूह मैं बसे रहते हैं तेरे उसी रूह के साथ फ़ना हो जाते हैं
कभी गम ना रहा की तुझे छू ना सके
हम तो फक्र से कहते हैं बिना छूए ही हम हर बार हर जन्म उनकी रूह में बस जाते हैं
-गौरव
