Hindi Love Poem for Life Partner-हमसफ़र


आँखों ही आँखों में
बातें इशारों में
तुमने जो मुझसे कहीं है
ऐसा क्यों लगता है
जैसे की तुमको भी मुझसे
मोहब्बत हुई है
ऐ हमसफ़र,मेरे हमसफ़र
देखूँ हर जगह
आये तू ही नज़र
ऐ हमसफ़र, मेरे हमसफ़र
तारीफें तेरी
कैसे करे हम कैसे करे हम
ख्वाईशें हलचल मची है
दिल में ये मेरे दिल में जो मेरे
तुम आ गए सांसो में तू
मेरी बातों में तू
मैंने माँगा जिसे
वो दुआ तू ही तू
आँखों ही आँखों में
बातें इशारों में
तुमने जो मुझसे कही है
ऐसा क्यों लगता है
जैसे की तुमको को भी
मुझसे मोहब्बत हुई है
ऐ हमसफ़र मेरे हमसफ़र
देखूँ हर एक जगह
आये तू ही नज़र

-गौरव

Aankho hi aankhon mein
Baatein isharon mein
Tumne jo mujhse kahi hai
Aisa kyu lagta hai
Jaise ki tumko bhi
Mujhse mohabbat hui hai
Ae humsafar, Mere humsafar
Dekhu har ek jagah
Aaaye tu hi nazar
Ae humsafar,  Mere humsafar
Taarife teri
Kaise kare hum Kaise kare hum
Khwaishe Hulchal machi hai
Dil mein ye mere Dil jo mere
Tum aa gaye Saanso mein tu
Meri baaton mein tu
Maine manga jise
Wo dua tu hi tu
Aankhon hi aankhon mein
Baatein isharon mein
Tumne jo mujhse kahi hai
Aisa kyu lagta hai
Jaise ki tumko bhi
Mujhse mohabbat hui hai
Ae humsafar,Mere humsafar
Dekhu har ik jagah
Aaaye tu hi nazar

-Gaurav

Hindi Love Poem For Her-जाने क्या रिश्ता है


जाने क्या रिश्ता है जाने क्या नाता है तुमसे
अनजाना सा एहसास है अनजानी सी राह है
जाने क्या चाहता है यह बावरा मन
इसकी लीला यही जाने
ना कहुँ तुझे चाँद का टुकड़ा
ना कहुँ तुझे मेरे लिये बनाया है
बस इतना कहुँ की तू जीने का सहारा है
जाने क्या रिश्ता है तुमसे जाने क्या नाता है
अनजानी सी राहों पर चलना
अनकही बातें महसूस करना
हर आहट में तुझे महसूस करना
शायद तुम्हे याद करने के तरीके बन गये है
तेरी आँखों की नमकीन मस्तियाँ क्यों घायल करे मुझे
इन एहसासों को कैसे बाँधू मैं
मैं खो जाऊँ तुम्हारी इन नशीली आँखों में
मैं फिर कहा जोर इस ज़माने को
जाने क्या रिश्ता है क्या नाता है तुमसे

-सोना

Jane kya rishta hai jane kya nata hai tumse
Anjana sa ehsas hai anjani si rahe hai
Jane kya chahta hai yeh bawra man
Iski leela yahi jane
Na khu tuje chand ka tukda
Na khu tuje mere liye banaya hai
Bs itna khu ki tu jine ka sahara hai
Jane kya rishta hai tumse jane kya nata hai
Anjani si raho par chalna
Ankahi baatein mehsus karna
Har aahat mai tumhe mehsus karna
Sayd tumhe yad krne ke tarike ban gye hai
Teri aankhon ki namkeen mastiyan kyu gayal kare muje
En ehsaso ko kese bandhu mai .
Mai kho jau tumhari in nashili aankho mai
Fir kha jaur is jamane ko
Jane kya rishta hai jane kya nata hai tumse..

-Sona

Hindi Poems on Love – वो पगली सी दीवानी सी


वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है,
आहट उसकी, जैसे दिल में हलचल सी कर जाती है,
झुकी नजर उसकी, जैसे मुझको पागल कर जाती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है। आइना है
उसकी नज़रें, जो सबकुछ बतलाती है, वो है पागल,
जो दिल को झुटा बतलाती है, लगती है प्यारी,
जब खुद ही वो शर्माती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है। कहता है
जमाना कि, वो तो पागल है, वे-वजह, जब-जब वो मुस्कुराती है,
जमाने को क्या पता, कि वो मुझसे क्यों शर्माती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।
जब आँखें मेरी मदहोश चेहरे से उसके, मिलकर आती हैं,
काश वो समझ पाती कि, कितना मुझको वो तड़पती हैं,
खो गया गया हूँ मुझसे मै, न नींद मुझको अब आती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।….

– अतुल कुमार

Wo pagli si diwani si, sapno me mere aati hai,
Aahat uski, jaise dil me hulchul si kar jati hai,
jhuki nazar uski, jaise mujhko pagal kar jati hai,
Wo pagli si diwani si, sapno me mere aati hai. Aaina hai
Uski nazrein, jo sabkuchh batlati hai, wo hai pagal,
jo dil ko jhuta batlati hai, lagti hai pyari,
jab khud hi wo sharmati hai,
Wo pagli si diwani si, sapno me mere aati hai. Kehta hai
jamana ki, wo pagal hai, Be-wajah, jab-jab wo mushkurati hai,
jamane ko kya pta, ki wo mujhse kyun sharmati hai,
Wo pagli si diwani si, sapno me mere aati hai.
Jab aankhein meri madhosh chehre se uske, milkar aati hai,
Kash wo samajh pati ki, kitna wo mujhko tadpati hai,
Kho gya hu mujhse me, na neend mujhko ab aati hai,
Wo pagli si diwani si, sapno me mere aati hai.

– Atul Kumar

Hindi Poem on First Love – बस तेरी याद में


 

दुनिया से में छिपता – छिपाता ,
न जाने कब तुझको चाहने लगा !
न चाहते हुए भी चुपके से तेरे पीछे आने लगा !

तुझे देखे बिना न ही नींद आती , और न ही चैन ,
लगता है , ये दीवाना दिल कहीं खोने लगा ।
याद में तेरी रातों को रोने लगा !

सोचता हूँ ,
क्या था तेरा मेरा रिश्ता ?
जो तुम मुझे याद नहीं करते ,
और हम तुम्हे भुला नहीं पाते !

काश ! तुम मेरे होते , फिर रोज नए सबेरे होते ,
लेकिन ये हो न सका ….

तुम न मेरे हुए , और न ही मेरे दिल के
तुम तो बस मेरी यादों के होकर रह गए !

ये रिश्ता जो है , तेरे मेरे दरमियां ,
इक मुलाकात की ख्वाहिश रखता है !

दिल जलता है , रोता है ,
तेरी याद में ,
बस तेरी याद में !

-रोहित चौरसिया

Duniya se main chhipata-chhipata
Na jane kab tujhko chahne laga
Na chahte hue bhi chupke se tere peeche aane laga

Tujhe dekhe bina na hi neend aati aur na hi chain
Lagta hai ye deewana dil kahi khone laga
Yaad mein teri raaton ko rone laga

Sochta hoon
Kya tha tera mera rishta
Jo tum mujhe yaad nahi krte
Aur hum tumhe bhula nahi pate

Kash tum mere hote,Fir roz naye savere hote
Lekin ye ho na saka

Tum na mere hue na hi mere dil ke
Tum to bas meri yaadon ke ho kar reh gaye

Ye rishta jo hain tere mere darmiyaan
Ek mulakat ki khvahish rakhta hai

Dil jalta hai rota hain
Teri yaad mein
Bas teri yaad mein

-Rohit Chaurasiya

Hindi Poem For Girlfriend- दिल की बाते


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कह दूँ आज सारी दिल की बाते
तू अच्छी लगती है
तेरी बाते अच्छी लगती है
तेरा रोना अच्छा लगता है
तेरा हँसना अच्छा लगता है
तेरा चलना अच्छा लगता है
तेरी गाली अच्छी लगती है
तेरा देखना अच्छा लगता है
तेरी नराजगी भी अच्छी लगती है
तेरी सूरत अच्छी लगती है
तेरी मुस्कान अच्छी लगती है
तेरी आँखे अच्छी लगती है
तेरा मारना अच्छा लगता है
तेरा घूरना अच्छा लगता है
तेरी दी हुई चीजें अच्छी लगती है
10 की फटी नोट अच्छी लगती है
तेरे बालो की पीन अच्छा लगता है
तेरा चश्मा अच्छा लगता है
मिर्ची खाकर रोना अच्छा लगता है
सारी चॉकलेट्स अच्छा लगता है
लाइब्रिरी की यादें अच्छी लगती है
तेरी जूती अच्छी लगती है
यहाँ तक तेरी साईकल भी अच्छी लगती है
तेरी गालिया अच्छी लगती है
तेरा सूट भी अच्छा लगता है
तेरे नखरे अच्छे लगते है
तेरी याद मे रोना अच्छा लगता है
तेरा करीब आना अच्छा लगता है
दुरिया को छोड़ बाकी सब अच्छा लगता है
तेरे पास बैठना अच्छा लगता है
तेरे साथ रोना अच्छा लगता है
तेरे साथ हँसना अच्छा लगता है
तेरे साथ चलना अच्छा लगता है
तुज़े मारना अच्छा लगता है
तेरी तड़प अच्छी लगती है
तेरी रन्गत अच्छी लगती है
तुझे डायरी मे लिखना अच्छा लगता है
तेरी तस्वीरे अच्छी लगती है
तेरी गलती अच्छी लगती है
तू सही है अच्छी लगती है
तेरा चिल्लाना अच्छा लगता है
तेरा चुप रहना अच्छा लगता है
तुज़े रुलाना अच्छा लगता है
तुज़े हँसाना अच्छा लगता है
पर इन सब से एक अलग एक और
तेरा गुस्सा
अब तो तेरा गुस्सा भी अच्छा लगता है
वजह ना पूछना यार
बस तुम और सिर्फ तुम अच्छे लगते हो
पागल था या पग्ला गया हूँ मालूम नहीं
गलत था या गलत हू मालूम नहीं
अब और क्या कहूं मैँ
बस तू अच्छी लगती है
तू अच्छी लगती है
और तू ही अच्छी लगती है

– गीतेश बॉस

Hindi Poem For Angry Girlfriend- छल मत कर


hindi poem for angry girlfriend.jpg

छल मत कर छल मत कर
छल मत कर सब जान कर तू
बनी,बनाई बात तू बिगाड़ मत तू
रोता है मन मेरा ये जान कर कि
अच्छी-खासी रिश्ते को बिगाड़ा है अभी
था मैं अकेला जब तू थी नही
तूने ही धड़काया दिल जब तू थी मिली
है कोई बात तो कह दे ना साफ
दूर कर गिले शिकवे और कर दे ना माफ़
तेरे आँखों से मुझे लगता है यही
करती है तू प्यार मुझे उतना ही अभी
इतना गुस्सा ठीक नही मान भी जाओ प्यारी
तेरे गुस्से से मैं मर जाऊ वारी वारी
जो भी बात थी तुझे कहना था मुझसे
नही डालती तू रंग में भंग और न होता मैं दंग तुझसे
करता हूँ मैं प्यार तुझे सागर से भी गहरा
उठता है दिल में मेरे बवंडर,लहरो का घेरा
सारी गलती खुद ही माना, अब क्या करु बोल
तेरी गलती माफ़ किया, अब तो कुछ तो बोल
मान भी जाओ रानी अब मत कर ज्यादा देर
नही तो भूल जाऊंगा जल्द ही देर सवेर
मत रख तू मौन व्रत और बन पहले जैसी
रख मुख पर मुस्कान और बन फिर से वैसी
अब ज्यादा न कर देर तू फिर से
नही तो रूठ जाऊंगा मैं तुझसे
है तू भोली,नादान और मासूम अभी भी
चेहरे पर दिखता है तेरा प्यार अभी भी
नही आता है तुझे कहना तो कोई बात नही
मत कर प्यार मुझसे पर कर बात ही सही
डर लगता है मुझे तेरे समक्ष कहना
कि रूठ न तू मुझसे नही तो हो जायेगा दूवर जीना
बस कर यार अब कर भी ले बात
समकक्षी हूँ तेरा नही तो तड़पूंगा प्रत्येक वार
चल जीत गयी तू,मान ली मैंने हार
बस कर अब बस कर अब कर भी ले मुझसे बात

विशेष मित्र के लिए समर्पित
ये कविता उन युवक युवतियों के लिए है जो किसी रिश्ते में बन्धने के बाद किसी कारण और गलत फ़हमी से अलग हो जाते है ! ये कविता उनके रिश्ते को सुधारने और उन्हें जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने का काम अवश्य करेगी। कृपया कविता का मर्म समझने की कोशिश करे और खुद गलती मान कर अपने रिश्ते की डोर में गांठ न आने दे

-सारांश सागर

Hindi Love Poem for Him-रंग खिलता जाये


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मेरा रंग हुस्न का खिलता जाये,
तू ही मेरे दिल को भाये,
मुझ पे चढ़ी जवानी योवन छाये,
मैं हुई बावरी तेरी,
मैं हुई दीवानी तेरी,
ख़यालों में तेरे जब भी डूबूं,
तेरी ही बाहों में झूमूँ,
तितली के मैं साथ चलूँ,
और दिल में तेरे रहलूँ,
ये प्यार कैसे रंग सजाये,
मेरा रंग हुस्न का खिलता जाये,
तस्वीर तेरी मैं रोज़ बनाऊँ,
प्यार के रंगों से उसे सजाऊँ,
मैं गुस्सा होके उससे रूठूँ,
उससे ही मैं तो कह दूँ,
कैसे कैसे रोग लगाये,
ये प्यार कैसे रंग सजाये,
मेरा रंग हुस्न का खिलता जाये,
तू ही मेरे दिल को भाये.
-ट्रू लव