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Hindi Love Poem on Separation- मैं और मेरी तन्हाई

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मैं और मेरी तन्हाई बैठे थे आज…
और हो रही थी मेरे प्यार की बात…
तन्हाई ने कहा कैसा प्यार है तेरा…
जो आज तक है उसने मुंह फेरा…
मैं था चुप और इस से तन्हाई थी हैरान…
मैं था शांत और इस से तन्हाई थी परेशान…
तन्हाई ने कहा क्या मिला तुझे प्यार में…
इस से अच्छा बैठा होता कही ऐशो बहारो में…
तन्हाई बोली क्या है अब पास में तेरे…
छा गए हैं बादल और गमों के अँधेरे…
मैं था चुप और इस से तन्हाई थी हैरान…
मैं था शांत और इस से तन्हाई थी परेशान…
तन्हाई ने कहा की प्यार में बहुत फरेब है धोखा है…
जा कुछ और कर प्यार के अलावा तुझे क्या किसी ने रोका है…
तन्हाई ने कहा क्या है ये प्यार का अजूबा…
जा, यार के वापिस आने की उम्मीद में मत रह डूबा…
मैं था चुप और इस से तन्हाई थी हैरान…
मैं था शांत और इस से तन्हाई थी परेशान…
तन्हाई ने कहा तेरा बिछड़ा यार नहीं आएगा…
मुझे लगता है तू कभी अपना प्यार नहीं पायेगा…
तन्हाई बोली अरे मूर्ख कुछ तो बोल…
मई इतनी देर से बक बक कर रही हूँ तू भी तो अपना मुंह खोल…
मैंने कहा बता कहाँ लिखा है की वो नहीं आएगी…
और अपने साथ प्यार की सौगात नहीं लाएगी…
कौन सी ऐसी दिवार है हमारे बीच जो खड़ी हो सकें…
ऐसी कोई दिवार नहीं बनी जिसकी नीव डलते ही हम उसे तोड़ न सकें…
कौन कहता है की उसका प्यार हो गया है पूरा…
क्यूंकि “प्यार” तो खुद शब्द ही ऐसा है जिसका पहला अक्षर है अधूरा…
कौन कहता है की प्यार सिर्फ दो जिस्मो का मिलान है…
माना वो मुझसे दूर है पर फिर भी मैं उसका और वो मेरी हमदम है…
अब बोल रहा था मई और चुप थी तन्हाई….
तभी सामने आई मेरी जान और भाग गयी तन्हाई…

-अनूप भंडारी

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Hindi Poem on Lost Love-बेवफ़ा कहेंगे उनको 

बेवफ़ा कहेंगे उनको broken-heart-1
ये कभी सोचा ना था
दर्द के दरिया में अकेले
डूबना चाहा ना था
कौन कहता बसर है
दिल की चाहत में खुदा
हमने जिसको चाहा था दिल से
वो ही निकला बेवफ़ा
वही गलियां वही राहें
वही सूनी सूनी निगाहें
क्या पता दिल का किसी को
कब बेगाना हो जाएगा
दिल की चाहत है मेरी
तुझको भी ना आये सुकून
क्या पता किस दिन
ये तडप तू पायेगा
-अनुष्का सूरी
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Hindi Love Poem for Girlfriend-तेरे न होने की मुझे फिकर तो है

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तेरे न होने की मुझे फिकर तो है,
मेरी ज़ुबाँ पर तेरा ज़िकर तो है,
ढूँढता हूँ तुम्हे मैं बीती हुई यादों में ,
उन चन्द लम्हों की मुलाकातों में ,
कैसे कहुँ तुमसे वो सारी बातें,
बेरुखी सी हो गई है अब हालतें,
किस हद तक तेरा इंतेजार करता हूँ,
अपनी साँसो को हर-पल बेक़रार करता हूँ,

तुमसे खफ़ा होना मुझे आता नहीं,
बिन देखे तुम्हे रहा जाता नहीं,
कैसी ये घड़ी ऋतु लायी है,
उनकी तस्वीर ही मेरे पास बच पायी है,
जब कभी अकेले में रोता हूँ,
भीगी पलकों से उसको देखता हूँ,

अब तो ये मेरी आदत बन चुकी है,
मेरी निगाहें अभी भी उसी पर टिकी हैं,
चलो चलता हूँ, फिर कभी मुलाकात करूँगा,
तेरे जवाब का मै इंतेजार करूँगा ,

-सत्यम राजा

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Hindi Miss You Love Poem-तेरी जुदाई रात भर तड़पाये

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हंसना भुला दिया तेरी इस जुदाई ने,
रोना सिखा दिया तेरी इस जुदाई ने,
सोचती रही हर पल हर घड़ी तेरे बारे में,
तेरी इन यादों ने आंसू दे दिये,
तेरी जुदाई में इस कदर शामिल हो गयी
कि मेरे होठों की मुस्कान ले गयी,
मुस्‍कान की जो वजह कभी देते थे तुम,
तुम ही मेरे होठों की मुस्कान ले गये,
तेरी बेवफाई ने भरोसा मेरा तोड़ दिया,
तेरी जुदाई ने मुझको तोड़ दिया,
जो खुशियों के फूल मेरे दिल में खिलते थे,
वहीं आज ग़म के काँटे चुभते हैं,
बिखर के टूट गये इस कदर
कि अब ना जीने के बहाने रह गये,
आँसू नहीं बहते थे जो पलकों से मेरी,
आज वही हर पल इन आँखों की पहचान बन गये,
तेरे प्यार की खुशबू में जो झूम उठती थी मैं,
उन्ही आँखों में तुम आज नफ़रत के आंसू दे गये,
जो जीने का एहसास देते थे तुम
आज तुम ही मेरे आँसुओं की वज़ह बन गये,
सोचा ना करूं तुम से प्यार
पर प्यार तुम तो मेरे रोने की वजह बन गये.
-कविता परमार
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Sad Hindi Love Poem on Pain-मेरा गम

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गम में जीने को कहता है ये दिल,
हमेशा तुझे महसूस करता है ये दिल,
तेरी याद में रुलाता है ये गम,
तेरी खुशी में हँसाता  है ये गम,
नासमझ बना देता है मुझे ये गम,
समझती है सिर्फ तू मुझे is गम में,
जिस दिन मैने तुझे दिया ये गम,
उस रात आँखें हुई मेरी नॅम,
कभी रोया,कभी हंसा, कभी सहमा इस गम में,
कभी संभाला,कभी सहलाया मुझे इस गम ने,
लड़ने की हिम्मत दी मुझे इस गम ने,
मुझको ज़िंदगी का आईना दिखाया इस गम ने ,
एक अटूट सा रिश्ता है जिससे,
सदा रहना है साथ जिसके,
वादा है रहेगा ये गम
जब तक है सांसों में दम ..
-कविता परमार
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Hindi Love Poem on Pain-क्यों?

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क्यों इतना दर्द सहना पड़ता है?
क्यों रास्ते पर चलो तो कोई छेड़ देता है?
घर पर बैठो तो पति हाथ मरोड़ देता है,
किस से बताऊँ मैं अपना दर्द,
अपने तो सपने से लगते है,
कभी हाथ उठाते है,
कभी शब्दों से ही मार देते है,
क्यों इतना दर्द सहना पड़ता है?
देखा था मैने भी एक सपना,
बसा बसाया घर था मेरा अपना,
प्यार के अलावा और कुछ ना था,
ना दुख ना दर्द और ना ही आंसू थे,
खुशियों से भरा मेरा संसार क्यों बिखेर दिया उन ज़ालिमों ने?
क्यों झूठे वादे किये तूने?
क्यों झूठे सपने दिखाये तूने?
क्यों झूठी कसमे खाई तूने?
जब छोड़ के ही जाना था मुझे
तो अपना बनाया ही क्यों तूने?
कोई आए और ले जाये मुझे,
खुल के जीना चाहती हूँ मैं,
आसमान में उड़ना चाहती हूँ मैं,
लहरों में तैरना चाहती हूँ मैं,
सपनों को उड़ान देना चाहती हूँ मैं,
इंसान हूँ, इंसान की ज़िंदगी जीना चाहती हूँ मैं
क्यों इतना दर्द सहना पड़ता है?
क्यों अपनी इच्छाओं को मारना पड़ता है?
क्यों कोई मेरी परवाह नहीं करता है?
हर कोई अपनी बात मनवाता है,
मेरी बात कोई क्यों नहीं सुनता है?
क्यों इतना दर्द सहना पड़ता है?
-कविता परमार
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Hindi Romantic Poem on First Love-पहले प्यार का इंतज़ार

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बीत गये दिन बीत गये लम्हे
बीत गये कई साल
पर मेरी यादों में बसते हैं अब भी तेरे खयाल

याद है मुझे वो तेरी मुलाक़ात
आया था अजनबी बनके
लगता था फिर भी अपना सा
रिश्ता ना था तुझसे कोई
फिर भी लगता था पहचाना सा

धीरे धीरे वो दो दिन की मुलाक़ात
दोस्ती में बदल गयी
पता ना था, तुझसे इतनी गहरी दोस्ती हो जायेगी

मेरे होठों की मुस्कुराहट बन गया था तू
लगा फिर से जीने ये मेरा दिल
जो कि जीना भूल गया था

शाम को जब छत पर जाती तो
बहती हवा में तू जैसे ज़ुल्फें बिखेर देता
और अपने होने का एहसास दिला देता
जब अपने आप को आईने में संवारती
तो शर्म सी आने लग जाती
होने लगा था मुझे एक अजीब सा एहसास
होने लगा था मुझे तुझसे प्यार

जब बताने आया ये दिल अपने दिल की बात
तो देखा किसी और को तेरे साथ
टूट गया मेरा दिल काँच की तरह
बिखर गये मेरे सपने रेत की तरह

दोस्ती का ये एहसास मिट सा गया
ये नाज़ुक दिल अब पत्थर का हो गया
करता था फिकर सबकी ये दिल
पर अब इस दिल में किसी के लिये जगह नहीं रही
जगह तो तेरी थी
पर तुझे उस जगह की कदर नहीं रही

तोडा है मेरा दिल तूने खिलौना समझ कर
दूसरे का दिल मत तोड़ना मेरा समझ कर
याद तो बहुत करती हूँ तुझे
खुद को रोक नहीं पाती हूँ
पर ये दिल रोक लेता है मुझे
क्योंकि इसे अब डर लगने लगा है दोबारा टूटने से
एक दूसरे को पहचानते खूब थे
मगर तेरा साथ ना मिला
तुझसे प्यार बहुत करती थी
मगर बताने का मौका ना मिला

दुआ करूँगी तेरी सलामती के लिये
जब तक जियूँगी तब तक
ये टूटा हुआ दिल तेरे आने का इंतज़ार करता रहेगा
तब तक ये दिल तुझसे यूँ ही प्यार करता रहेगा
यूँ ही प्यार करता रहेगा…..

-कविता परमार

Pahle pyar ka intzaar

Beet gaye din beet gaye lamhe
Beet gaye kai saal
Par meri yadon mein baste hain ab bhi tere khayal

Yad hai mujhe vo teri mulaqat
Aaya tha ajnabi banke
Lagta tha fir bhi apna sa
Rishta na tha tujhse koi
Fir bhi lagta tha pehchana sa

Dheere dheere vo do din ki mulaqat
Dosti mein badal gayi
Pata na tha ,tujhse itni gehri dosti ho jayegi

Mere hothon ki muskurahat ban gaya tha tu
Laga fir se jeene ye mera dil
Jo ki jeena bhool gaya tha

Shaam ko jab chat par jati to
Bahti hawa mein tu jaise zulfein bikher deta
Aur apne hone ka ehsaas dila deta
Jab apne aap ko aayine mein sawarti
To sharm si aane lag jati
Hone laga tha mujhe ek ajeeb sa ehsas
Hone laga tha mujhe tujhse pyar

Jab batane aaya ye dil apne dil ki baat
To dekha kisi aur ko tere sath
Toot gaya mera dil kaanch ki tarah
Bikhar gaye mere sapne ret ki tarah

Dosti ka ye ehsaas mit sa gaya
Ye nazuk dil ab patthar ka ho gaya
Karta tha fikar sabki ye dil
Par ab is dil mein kisi ke liye jagah nahin rahi
Jagah to teri thi
Par tujhe us jagah ki kadar nahin rahi

Toda hai mera dil tune khilauna samajh kar
Dusre ka dil mat todna mera samajh kar
Yad to bahut karti hoon tujhe
Khud ko rok nahin pati hoon
Par ye dil rok leta hai mujhe
Kyon ki ise ab dar lagne laga hai dobara tootne se
Ek doosre ko pehchante khoob the
Magar tera sath na mila
Tujhse pyar bahut karti thi
Magar batane ka mauka na mila

Dua karungi teri salamati ke liye
Jab tak jiyungi tab tak
Ye tuta hua dil tere aane ka intzar karta rahega
Tab tak ye dil tujhse yoon hi pyar karta rahega
Yoon hi pyar karta rahega…..

-Kavita Parmar