
बहुत दिन गुज़र चुके
तेरे दूर जाने में
कितनी देर लगेगी और
तेरे लौट आने में
वैसे तो काम बहुत हैं
मुझे ज़माने में
लेकिन आशिक़ हूँ मैं
तेरा बताने में
आजा अब छोड़ ये लुक्का छिप्पी का खेल
किसी बहाने से
मैं हूँ तेरा तू है मेरी
सबको बताने में
-अनुष्का सूरी
Amazing, best original Hindi love poems, Hindi shayari on love and romance, romantic Hindi poetry and Hindi prem kavita|हिंदी प्रेम कविता संग्रह और शायरी

बहुत दिन गुज़र चुके
तेरे दूर जाने में
कितनी देर लगेगी और
तेरे लौट आने में
वैसे तो काम बहुत हैं
मुझे ज़माने में
लेकिन आशिक़ हूँ मैं
तेरा बताने में
आजा अब छोड़ ये लुक्का छिप्पी का खेल
किसी बहाने से
मैं हूँ तेरा तू है मेरी
सबको बताने में
-अनुष्का सूरी

ना जाने क्यों वो मुझसे इतना प्यार करता है
मेरी हर चीज़ का खयाल रखता है
इन छोटी सी आँखों में सपने सुहाने लिये
क्यों मेरे आने का इंतज़ार करता है
उसकी मुस्कुराहट पे हम मर गये
ना जाने कब हम उनके दिल में समां गये
जिस की हासी पे मरने का दिल करता है
जो कह दे तो फिर से जीने का दिल करता है
ऐसा हमसफर मिला है मुझे
जिसके प्यार के लिये जान देने का दिल करता है
क्या कहूँ और उसकी तारीफ में
बस यूँ ही उससे प्यार करने का दिल करता है
-कविता परमार

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तेरी यादों में लिखे कुछ खत मुझसे बात किया करते हैं,
याद करता हूँ हमारी मुलाकात को तो एहसास प्यार का दिया करते हैं,
कहते हैं उन पलों की कहानी जब तेरी यादों में घंटो इंतज़ार किया करते थे..
लिखते थे खत हज़ारों इंतज़ार ए मुहब्बत में पर तुमको ना दिया करते थे ,
और धीरे धीरे वो वक़्त की धारा भी बह गयी,,
तुमसे विदाई का पल भी आ गया,
नाम थी हमारी पलकें जुदाई के बादल भी छा गये,
बस सोचते रहे की कुछ पलों में तुम नज़रों से दूर हो जाओगे,
फिर दिल की धड़कन को अचानक क्या हो गया,
कुछ पल थम सी गयी हमारी सांस भी
जब उन्होने दिल पे हाथ रख दिया,
इज़हार जो मुहब्बत का हम ना कर पाये
तीन सालों में वो प्यार का इज़हार उन्होने कर दिया,
बस देखते रहे उनको हम फिर गले से उनको लगा लिया,
करते हैं बेपनाह प्यार हम भी उन्हें, उनको ये जता दिया,
फिर वो मुस्कुराये एक पल
प्यार के वो खत हम से उन्होने मांग लिये,
हम भी कुछ पल रह गये स्तब्ध,
और वो ये कहके गले हम से लग गये,
कि आप के लिखे खतों की खुश्बू हमको पहले साल ही छू गयी,
बस करते रहे इसलिये इंतज़ार की इज़हार ए मोहबत आप कर दोगे,
पर दिल ने कहा अब ना सह पायेगा ये दूरी तुमसे,
ये दिल की आवाज़ सुनके प्यार का पहला इज़हार हम ही आपसे कर गये.
-गौरव

मैं तेरे चहरे को पढ़ना चाहता हूँ किताब की तरह
तेरे साथ बीते हुए हर लम्हे को पिरोना चाहता हूँ ख्वाब की तरह
मैं जानता हूँ नहीं मिल सकता हूँ तुमको हर रोज़..
इसलिये ख्वाबों में आके गले लगाना चाहता हूँ मीठे एहसास की तरह.
गले मिलता हूँ जब मैं तो आँखें मेरी नॅम हो जाती हैं
भीगी हुई पलकों से लिपट के रोना चाहता हूँ तेरी याद की तरह..
चंद पल जब रह जाते हैं सवेरा होने में..जी भर के रोना चाहता हूँ
एक बार गले लगा लेना चाहता हूँ इस रात के खूबसूरत एहसास की तरह
–गौरव
