कुछ इस कदर एक दूसरे से जुड़े हम
कि मेरे साये ने भी कहा आखिर क्यों जुड़े हम
इतनी पास आकर भी तुम मुझसे दूर क्यों हो
इतनी दूर जाकर भी तुम मेरे पास क्यों हो
मेरे पास आकर मेरे दिल में बस जाओ
एक कोशिश तो करो तुम मेरे बन जाओ
– दृष्टि
Hindi Love Poems| प्रेम कविता |Romantic Poems|Prem Kavita
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कुछ इस कदर एक दूसरे से जुड़े हम
कि मेरे साये ने भी कहा आखिर क्यों जुड़े हम
इतनी पास आकर भी तुम मुझसे दूर क्यों हो
इतनी दूर जाकर भी तुम मेरे पास क्यों हो
मेरे पास आकर मेरे दिल में बस जाओ
एक कोशिश तो करो तुम मेरे बन जाओ
– दृष्टि

I-In aankhon main tera chehra hai har pal
L-Labon pe har pal tera naam
O-Os ki bundo si hai tu komal
V-Varshti hai jo mujh pe ban ke pyar
E-Ehsas hai mere dil ki dhadkan ka
Y-Ye jo dil mein rahta hai tera pyar
O-Or (Aur)
U-Unke dil ko choo ke deewana sa bana deta hai unka pyar
-Gaurav
एक दिन, दिन के उजाले की तरह तू आया मेरी ज़िंदगी में ..
तेरे आने से बदलने लगी मेरी ज़िंदगी
तेरी मुस्कुराहट से जीने लगी मेरी ज़िंदगी.
तूने हँसना सिखाया तो तेरी वजह से कभी रोना भी आया
तूने कभी एक दोस्त की तरह मुझे समझाया तो कभी मुझे सहलाया
जब अपनों ने साथ छोड़ दिया
तो पराया होकर तूने साथ निभाया
खो सी गयी थी अपनी दुनिया में
तूने मुझे रास्ता है दिखाया
तेरे साथ ने मुझे अपने आप से है मिलाया..
जो बूंद गिरी तेरी ज़ुल्फ़ों से
वो प्यार बनके छा गयी
बरसी मेघों से
कुछ अरमान जगा गयी
भीगते रहे हम तेरी ज़ुल्फ़ों के साये में
वो पल पल ही बरसती रही
घटा इन ज़ुल्फ़ों की छाँव को दिखाती है
लिपटकर मेरे सीने से
दिल में हलचल म़चाती हैं
अब तो अरमान है
बस तेरे प्यार की बारिश से भीग जाऊँ
कहीं दिल से लगा लूँ तेरी धड़कन को
और तेरी धड़कन में समा जाऊँ कहीं
-गौरव
तेरी यादों के सायों ने मजबूर कर दिया
आँखों की नमीं ने आँखों को नॅम कर दिया
पल पल तेरी यादों ने जुदाई के बादल ला दिये
पल पल भीगे थे जो तेरे एहसास मेरे साथ उन एहसासों के साये ला दिये
आँखों की नमी भी आँखों में समां न सकी
पहलू मैं छुपके मेरे दर्द की वजह बन गयी
धीरे से आके समाने लगी वो नमीं मेरे हाथों में
तेरी खुशियों की दुआ बन गयी
जिसे करता हूँ इतना प्यार उसकी खुशी ही मेरे जीने की वजह बन गयी
दर्द के साये मे भी दिल बहलने लगा,
मेरे आंसुओं का रंग भी बदलने लगा,
इतने करीब आकर उसने ज़ख्म दिये मुझे,
सांसें चलती रही पर दम निकलने लगा,
मेरी राहों मे हज़ार कांटे बिखेर कर,
अब वो खुद मेरा हमसफर बनने लगा,
उसके दिये जख्मो मे मैं प्यार तलाश करती रही,
वो मुझे प्यार करते-करते दर्द मे डुबाने लगा |