Romantic Poem on First Love – Pehla Pyar

पहला प्यार
तेरी आँखों में देखा तो हर ख़ुशी दिख गयी
सोचती हूँ क्या था तेरी आँखों में जो मैं खिल गयी
अजीब सा महसूस कुछ कर रही थी मैं
अलग सी चमक कुछ थी मेरे चेहरे पे
सोचा बताऊँ किसी को
पर क्या बताऊँ पता नहीं क्या था वो एहसास
कौन था तू भूल न पायी
रातों को काफी कोशिश के बाद भी सो न पायी
सवाल से घिरी, उलझन मन की सुलझा न पायी
ढूंढ रही थी तेरी आँखों को
जहाँ देखा था पहले तुझको
पूछ रही थी सबसे पर अनजान थी
कि तू देख रहा था मुझको
दिल मेरा धड़का ज़ोरों से
जब टकराई मेरी नज़रें तुझसे
पता नहीं फिर क्या हुआ
खो गए हम दोनों पूरे दिल से बदल गयी मैं पूरी
बन गया तू दुनिया मेरी
वो बातें वो मुलाकातें बन गयी थी आदत मेरी
हम दोनों और हमारा साथ सबसे प्यारा था
वो पहली नज़र का, वो मेरा पहला प्यार था
-मनीषा सुल्तानिया

Pehla Pyar
Teri aankho mein dekha toh har khushi mil gayi
Sochti hu kya tha teri aankho mein jo mai khil gayi
Ajeeb sa mehsus kuch kar rahi thi mai
Alag si chamak kuch thi mere chehre pe
Socha batau kisi ko
Par kya batau pata nahi kya thh wo ehsaas
Kaun thha tu,bhul na paayi
Raato ko kaafi koshisho ke baad bhi so na paayi
Sawaal se ghiri,uljhhane man ki suljha na paayi
Dhund rahi thi teri aankho ko,
Jaha dekha thha pehle tujhko
Puch rahi thi sabse, par anjaan thi
Ki tu dekh raha tha mujhko
Dil mera dhadka zoro se
Jab takrayi meri nazrein tujhse
Pata nahi fir kya hua,
Kho gaye hum dono pure dil se
Badal gayi mai puri
Ban gaya tu duniya meri
Wo baate wo mulakate ban gayi thi aadat meri
Hum dono aur humara saath sabse pyaara tha
Wo pehli nazar ka, wo mera pehla pyaar tha
-Manisha Sultaniya

Hindi Poem on First Love: मेरा पहला सच्चा प्यार्

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आती है वो हर रोज़ सज धजकर,
कभी ग्रीन-ब्ल्यू सूट तो कभी जीन्स टॉप पेहनकर,
मैं कभी बराबर में बैठता हूँ तो कभी उसके पीछे,
मेरा दिल रखता है उसकी यादों को सींचे,
मुझे देखकर मुस्कुराती है,
पर मुझे क्यों ऐसा लगता है
कि लड़कियाँ  ऐसे ही बेवाकूफ बनाती हैं,
मेरा दिल धडकता है कई बार उसको देखकर,
क्यों कि रब ने बनाया है उसको बड़ा तराशकर,
वो शर्माती रहती है,
लेकिन जानता हूँ मुझसे प्यार् ज़रूर करती है,
मगर ना जाने ज़ुबान पर लाने से क्यों डरती है,
थोडी अनजान है इस प्यार् की दुनिया में
समझ जाएगी,
प्यार् की दुनियाँ जननत है
जान जायेगी,
जब पहली बार उसे देखा था ,
मैं तो उस पर मर मिटा था,
मेरा हर पल इसका गवाह है,
कि उससे बेशुमार मुहब्बत करता हूँ,
क्योंकि उसकी हर एक अदा को लाइक करता हूँ,
गुस्सा बहुत आता है,
जब मेट्रो स्टेशन पर मेल चेकिंग हो रही होती है,
और वो मेरा इंतज़ार करती रहती है,
जब मैं प्लेटफार्म पर पहुंचता हूँ,
तो उसकी ट्रेन जा रही होती है,
फिर पूरा दिन सेड जाता है,
वो क्लास में केमिस्ट्री को समझ रही होती है,
पर मैं उसके दिल की केमिस्ट्री को समझता रहता हूँ,
इतना भी खराब नहीं योगेश् मेरा नाम,
और क्या क्या बताऊँ अपने दिल का हाल…
-योगेश जमदाग्नी

Hindi Romantic Poem on First Love-पहले प्यार का इंतज़ार

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बीत गये दिन बीत गये लम्हे
बीत गये कई साल
पर मेरी यादों में बसते हैं अब भी तेरे खयाल

याद है मुझे वो तेरी मुलाक़ात
आया था अजनबी बनके
लगता था फिर भी अपना सा
रिश्ता ना था तुझसे कोई
फिर भी लगता था पहचाना सा

धीरे धीरे वो दो दिन की मुलाक़ात
दोस्ती में बदल गयी
पता ना था, तुझसे इतनी गहरी दोस्ती हो जायेगी

मेरे होठों की मुस्कुराहट बन गया था तू
लगा फिर से जीने ये मेरा दिल
जो कि जीना भूल गया था

शाम को जब छत पर जाती तो
बहती हवा में तू जैसे ज़ुल्फें बिखेर देता
और अपने होने का एहसास दिला देता
जब अपने आप को आईने में संवारती
तो शर्म सी आने लग जाती
होने लगा था मुझे एक अजीब सा एहसास
होने लगा था मुझे तुझसे प्यार

जब बताने आया ये दिल अपने दिल की बात
तो देखा किसी और को तेरे साथ
टूट गया मेरा दिल काँच की तरह
बिखर गये मेरे सपने रेत की तरह

दोस्ती का ये एहसास मिट सा गया
ये नाज़ुक दिल अब पत्थर का हो गया
करता था फिकर सबकी ये दिल
पर अब इस दिल में किसी के लिये जगह नहीं रही
जगह तो तेरी थी
पर तुझे उस जगह की कदर नहीं रही

तोडा है मेरा दिल तूने खिलौना समझ कर
दूसरे का दिल मत तोड़ना मेरा समझ कर
याद तो बहुत करती हूँ तुझे
खुद को रोक नहीं पाती हूँ
पर ये दिल रोक लेता है मुझे
क्योंकि इसे अब डर लगने लगा है दोबारा टूटने से
एक दूसरे को पहचानते खूब थे
मगर तेरा साथ ना मिला
तुझसे प्यार बहुत करती थी
मगर बताने का मौका ना मिला

दुआ करूँगी तेरी सलामती के लिये
जब तक जियूँगी तब तक
ये टूटा हुआ दिल तेरे आने का इंतज़ार करता रहेगा
तब तक ये दिल तुझसे यूँ ही प्यार करता रहेगा
यूँ ही प्यार करता रहेगा…..

-कविता परमार

Pahle pyar ka intzaar

Beet gaye din beet gaye lamhe
Beet gaye kai saal
Par meri yadon mein baste hain ab bhi tere khayal

Yad hai mujhe vo teri mulaqat
Aaya tha ajnabi banke
Lagta tha fir bhi apna sa
Rishta na tha tujhse koi
Fir bhi lagta tha pehchana sa

Dheere dheere vo do din ki mulaqat
Dosti mein badal gayi
Pata na tha ,tujhse itni gehri dosti ho jayegi

Mere hothon ki muskurahat ban gaya tha tu
Laga fir se jeene ye mera dil
Jo ki jeena bhool gaya tha

Shaam ko jab chat par jati to
Bahti hawa mein tu jaise zulfein bikher deta
Aur apne hone ka ehsaas dila deta
Jab apne aap ko aayine mein sawarti
To sharm si aane lag jati
Hone laga tha mujhe ek ajeeb sa ehsas
Hone laga tha mujhe tujhse pyar

Jab batane aaya ye dil apne dil ki baat
To dekha kisi aur ko tere sath
Toot gaya mera dil kaanch ki tarah
Bikhar gaye mere sapne ret ki tarah

Dosti ka ye ehsaas mit sa gaya
Ye nazuk dil ab patthar ka ho gaya
Karta tha fikar sabki ye dil
Par ab is dil mein kisi ke liye jagah nahin rahi
Jagah to teri thi
Par tujhe us jagah ki kadar nahin rahi

Toda hai mera dil tune khilauna samajh kar
Dusre ka dil mat todna mera samajh kar
Yad to bahut karti hoon tujhe
Khud ko rok nahin pati hoon
Par ye dil rok leta hai mujhe
Kyon ki ise ab dar lagne laga hai dobara tootne se
Ek doosre ko pehchante khoob the
Magar tera sath na mila
Tujhse pyar bahut karti thi
Magar batane ka mauka na mila

Dua karungi teri salamati ke liye
Jab tak jiyungi tab tak
Ye tuta hua dil tere aane ka intzar karta rahega
Tab tak ye dil tujhse yoon hi pyar karta rahega
Yoon hi pyar karta rahega…..

-Kavita Parmar