Hindi Love Poetry on Dream Girl-कविता से मुलाकात हो गयी

sadas
कविता से मुलाकात हो गयी
तन्हा मेरी ज़िंदगी में ख्वाबों की बरसात हो गयी,
एक दिन था अकेला, कविता से मुलाकात हो गयी,
कुछ वो मुझसे कहने लगी कुछ मैं उसे कहने लगा,
एक अनजाने अपने पहलू से मीठी कुछ बात हो गयी,
वो मेरे शब्दों में घुल गयी कविता बन के ज़िंदगी की कहानी कह गयी
तन्हाई के आलम से बाहर आने लगा अकेलेपन में मेरी हमसफर वो हो गयी,
कल्पना करता हूँ जब भी उसकी खूबसूरती की उसकी गहराई में डूब जाता हूँ,
ज़िंदगी के मेरे हर पल को एक पल में वो जीवन कर गयी,
शब्दों का ना वो जाल है ना कोई मायाजाल,
वो तो बस मेरे दिल का हाल है इतनी बात वो कह गयी,
हर खुशी हर गम को मेरे साथ वो सहती है
कुछ ना कहती है मुझसे हर पल हंसाती रहती है
रूप अनेक बनाती है कभी ग़ज़ल है, 
कभी है कविता, कभी शायरी वो कहलाती,
बस ओढ़ चुनरिया खुशियों की 
वो मेरे दिल को छू के जाती,
रात की गहराई हो या दिन का पहर 
साथ मेरे वो रहती है,
कभी रूठती है मुझसे कभी खेलती है 
मेरे संग मेरी कल्पना में जीती है,
अब ना जीना उसके बिन, 
मेरी सांसों में मेरी रूह में धड़कन बन के वो बस गयी,
तन्हा मेरी ज़िंदगी में ख्वाबों की रात हो गयी,
एक दिन था अकेला कविता से मुलाकात हो गयी
-गौरव

Hindi Love Shayari for Her-हज़ारो ग़ज़ल लिख गया

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उनकी खूबसूरती पे हज़ारों ग़ज़ल लिख गया,
उन्हें खूबसूरती का बेपनाह ताज कह गया,
संगमरमर से खूबसूरत है हुस्न जिनका,
उनके हुस्न को अजंता की मूरत लिख गया,
उनकी खूबसूरती पे हज़ारों ग़ज़ल लिख गया,
उनके जिस्म की खुश्बू मेरी रूह में बस गयी,
उनकी प्यारी छवि मेरे दिल में उतर गयी,
पायल छनकती आई वो इस दिल में,
उनकी पायल की चमचम को
सुरों से सजा कोई गीत लिख गया,
उनकी खूबसूरती पे हज़ारों ग़ज़ल लिख गया,
वो आके रात में बाहों में बस गये,
वो होंठों से होंठों को मेरे चू गये,
वो जिस्म में उतरेय इस कदर की मेरी सांस बन गये,
उनकी सांसो के जीने को जीने का अंदाज़ लिख गया,
उनकी खूबसूरती पे हज़ारों ग़ज़ल लिख गया,
उनकी आंखो से मिलना हुआ इस कदर की उनमें डूब गया,
देखता रहा बस उनकी आँखों को आँखों में खो गया,
चूमा जब उनकी आँखों को,
खूबसूरत पलकों पे सजा कोई ख्वाब लिख गया,
उनकी खूबसूरती पे हज़ारों ग़ज़ल लिख गया
-गौरव

Hindi Love Poetry, Love Shayari-मेरा क्या कसूर

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मेरा क्या कसूर
निगाहें तेरी कातिलाना हैं
इस में मेरा क्या कसूर?
खूबसूरत तू बेपनाह है
दीवाना मैं हो रहा हूँ
इस में मेरा क्या कसूर?
देखती हो जिस अदा से मुझको
प्यार तुमसे करने लगा हूँ
अपनी निगाहों को तुझे देखने से रोक ना पाऊँ
इस में मेरा क्या कसूर?
दिल कहता है कहीं और चल
पर कदम तेरी ओर खुद ही बढ़ जायें अगर
इस में मेरा क्या कसूर?
ख्वाब भी परेशन हैं
नींद भी हैरान है
मेरे सपनों में अब रोज़ रोज़ अगर तुम आओ
इस में मेरा क्या कसूर?
जब भी लिखता हूँ कविता कोई
अपने आप दिल की कहानी लिख जाती है ये मेरी कलम
इतना याद अगर तुम आओ
इस में मेरा क्या कसूर,
सहमे सहमे लबों से बोलना
शुरू कर दिया है तुमसे
पर ये ज़ुबान सिर्फ प्यार के ढाई अक्षर
अगर तुमसे कहना चाहे
इस में मेरा क्या कसूर?
-गौरव
Mera Kya Kasoor
Nigahein teri katilana hain
Is mein mera kya kasoor,
Khubsurat tu bepanah hai
Deewana main ho raha hoon
Is mein mera kya kasoor,
Dekhti ho jis ada se mujhko
Pyar tumse karne laga hoon
Apni nigahon ko tujhe dekhne se rok na paaoon
Is mein mera kya kasoor,
Dil kahta hai kahin aur chal
Par kadam teri ore khud hi badh jayein agar
Is mein mera kya kasoor,
Khwab bhi pareshan hain
Neend bhi hairan hai
Mere sapnon mein ap roz roz agar tum aao
Is mein mera kya kasoor,
Jab bhi likhta hoon kavita koi
Apne ap dil ki kahani likh jati hai ye meri kalam
Itna yaad agar tum aao
Is mein mera kya kasoor,
Sahme sahme labon se bolna
Shuru kr dia hai tumse
Par ye zuban sirf pyar ke dhai akshar
Agar tumse kahna chahe
Is mein mera kya kasoor.
-Gaurav