प्यार की मंज़िल क्या है बस और प्यार
दिल के समंदर का साहिल तू ही है यार
तू मेरा दिलबर तू ही है मेरा प्यार
तेरा ही तो रात दिन मैं करूँ इंतज़ार
बस एक तेरे लिये ही है मेरा दिल बेकरार
बढ़ता जा रहा है अब ये खुमार
तुझको पुकारे मेरा ये दिल बार बार
तू भी करले अब मुझसे प्यार

