
तेरे न होने की मुझे फिकर तो है,
मेरी ज़ुबाँ पर तेरा ज़िकर तो है,
ढूँढता हूँ तुम्हे मैं बीती हुई यादों में ,
उन चन्द लम्हों की मुलाकातों में ,
कैसे कहुँ तुमसे वो सारी बातें,
बेरुखी सी हो गई है अब हालतें,
किस हद तक तेरा इंतेजार करता हूँ,
अपनी साँसो को हर-पल बेक़रार करता हूँ,
तुमसे खफ़ा होना मुझे आता नहीं,
बिन देखे तुम्हे रहा जाता नहीं,
कैसी ये घड़ी ऋतु लायी है,
उनकी तस्वीर ही मेरे पास बच पायी है,
जब कभी अकेले में रोता हूँ,
भीगी पलकों से उसको देखता हूँ,
अब तो ये मेरी आदत बन चुकी है,
मेरी निगाहें अभी भी उसी पर टिकी हैं,
चलो चलता हूँ, फिर कभी मुलाकात करूँगा,
तेरे जवाब का मै इंतेजार करूँगा ,
-सत्यम राजा