Hindi Love Poem – मैं सुबह छोड़ जाऊंगा

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मैं सुबह छोड़ जाऊंगा तुम्हारे पास,
तुम शाम मेरी संभाले रखना,

दिनों के साथ गर मैं गुजर भी जाऊ,
तो पलको में मेरी सीरत बसाये रखना,

यादो में लिपटी दोस्ती गर भूल भी जाओ,
पर हो सके तो झगड़ो में छुपी वो मोहब्बत बचाये रखना,

मैं सुबह छोड़ जाऊंगा तुम्हारे पास,
तुम शाम मेरी संभाले रखना….!!!!

– मुसाफिर

Main subh chhod jaunga tumhare paas
Tum sham meri sambhale rakhna

Dino ke sath gar main gujar bhi jaun
To palkon me meri sirat basaye rakhna

yadon me lipti dosti gar bhul bhi jaun
Par ho sakey too jhagdo main chupi wo mohabbat bachaye rakhna

Main subah chhod jaunga tumhare paas
Tum sham meri sambhale rakhna

-Musafir

Sad Hindi Love Poem- दूसरों की बातों में

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दूसरों की बातों में लोग यूँही खो गए 
हमने शुरू किया बताना 
तो किस्से गलत हो गये 
हमारी तो किसी को जरुरत नहीं 
हमपे बात आयी तो सब खत्म  हो गये 
उन्होंने तो हमे कभी  याद भी न किया 
हमारे पास उनके सारे किस्से जतन हो गये 
हम जगाते रहे उनको सोचते सोचते 
और वो बेवफा हमे भुला के चैन से सो गये 
-गणेश मघर 

 

Dusro ki baaton me log yuhi kho gaye
Humne shuru kiya batana 
To kisse galat ho gaye
Humari to kisi ko jarurat nahi
Humpe baat aaye to sab khatam ho gaye
Unhone to kabhi hume yaad bhi na kiya
Humare pass unke sare kisse jatan ho gaye
Hum jagate rahe unko sochate sochate
Our wo bewafa hume bhula ke chain se so gaye
-Ganesh Magar

Painful Love Story-तेरा ही इंतज़ार था

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आ गयी तू मुझे तेरा ही इंतज़ार था …
तुझे शायद नहीं पता होगा, मैं कितना बेक़रार था

खैर, पता है जब तू यहाँ नहीं थी
तो मेरे साथ क्या हो रहा था
मैं तो आँखें बंद करके सो रहा था
फिर भी लोग कहते हैं की मैं रो रहा था

अब उन नासमझों को कौन समझाए
क़ि वो मैं रो नहीं रहा था
वो तो अंदर का सैलाब बह रहा था
तुझे तो पता होगा कि मैं रोता नहीं
हर आंसू में तस्वीर है तेरी
इसीलिए मैं उनको खोता नहीं

अरे यार तू कुछ बोलती क्यों नहीं
पहले की तरह ये अश्क़ मेरे पोंछती क्यों नहीं

पता है जब तू गयी थी
तो सब बोलते थे
कि जो चले जाते हैं वो कभी लौटते नहीं
पय मुझे यकीं था, की तू आएगी
क्योंकि तू प्यार है मेरा
और जज़्बात कभी मरते नहीं

पर खफा हूँ तेरे उस धोखे से
तूने बिना मांगे जो दिया उस तोहफे से
माना मैंने कहा था
अपना दिल देदे मुझे
इसका ये मतलब नहीं
पगली दिल देके ज़िन्दगी देगी मुझे
जब होश आया डॉक्टर ने बताया सब,
रुक गयी मेरी सब सांसें तब
फिर फैसला किया
मैं भी आरहा हूँ तेरे पास
पर फिर डिल से आई आवाज़ तेरी
पगले हूँ तो मैं तेरे साथ

याद है तुझे
वो रास्ते जो
तुझे बहुत पसंद थे
अक्सर आज भी मैं
वहां से गुज़रा करता हूँ
जो तू मुझे बातें करती
उन रास्तों पर वही आवाज़ें सुना करता हूँ मैं

तू यहाँ नहीं थी
तो तेरे लिए कविता लिखता था
अक्सर कागज़ के पन्ने
हवा में फेकता था
अब तू कहेगी, ऐसा क्यों?
क्या मैं पागल हो गया था?

पर मैं उन पन्नो पर
तेरी ही खुशबु खोजता था
अगर इसे पागलपन कहते हैं,
तो हाँ यार मैं पागल हो गया था

-नितेश गौर (बृजवासी)