Hindi Love Poem on Separation- प्यार की धड़कन


बिछड़ी प्यार की धड़कने
आँखों में नमी दे
बन्द राहों की उलझनें जीने न दे
वो खामोशियाँ भी इश्क़ को ही तलाशे
कुछ अनकही सी ख्वाइशें
दिल तो छुपा दे ये मोहोब्बत
कैसा जो अंग अंग लुटा न दे……

-स्वेता

Bichadi pyaar ki dhadkaney
Aankhon mein nami de
Bandh raahon ki uljhan Jeene na de
Vo khamoshiyaan bhi Ishq ko hi talashe
Kuch ankahi si khwaahishey
Dil ne chupa de Yeh mohobbat
kaisa Jo ang ang luta na de

-Swetha

Hindi Love Poem on Separation-आँखें जो खुली


आँखें जो खुली तो उन्हें अपने करीब पाया ना था
कभी थे रूह में शामिल आज उनका साया ना था
बेपनाह मोहब्बत की जिनसे उम्मीदें लिये बैठे थे
उनसे तन्हाइयों की सौगातें मिलेंगी बताया ना था
एक हम ही कसीदे हुस्न के हर बार पढ़ते रहे पर
उसने तो कभी हाल-ए-दिल सुनाया ना था
वो फिरते रहे दिल में ना जाने कितने राज लिये
हमने तो कभी उनसे जज्बातों को छुपाया ना था
जाने क्यों हम बेवजह मदहोश हुआ करते थे
जाम आँखों से तो कभी उसने पिलाया ना था
मीलों कब्ज़ा कर बना रखा था सपनों का महल पर
उसने वो ख़्वाब कभी आँखों में सजाया ना था
धड़कन ‘मौन’ हुई अब एक आह की आवाज़ है
शिकवा क्या उनसे जिसने कभी अपना बनाया ना था

-अमित मिश्रा

Aankhein jo khuli thi to unhe apne kareeb paya naa tha
Kabhi they ruh mein shamil aaj unka saya naa tha
Bepanaah mohabbat ki jinse umid liye beithe they
Unse tanhai ki saugate milegi btaya naa tha
Ek hum hi kaside husan ke har baar padte rahe par
Unse to kabhi haal ae dil sunaya naa tha
Wo firte rahe dil me naa jane kitne raaz liye
Hamne to kabhi unse jazbaton ko chupaya naa tha
Jane kyon hum bevajah madhosh hua karte they
Jaam aankhon se to kabhi usne pilaya na tha
Milon kabza kar bana rakha tha sapno ka mahal par
Usne wo khwab kabhi aankhon me sajaya na tha
Dhadkan maun hue ab ek aah ki aawaz hai
Shikwa kya unse jisne kabhi apna banaya naa tha

-Amit Mishra

Hindi Love Poem For Her – तो क्या हो गया


हाँ मचला था कुछ पल को दिल फिर सो गया
आज उससे फिर मिल भी लिये तो क्या हो गया
मोहब्बत की राहों में हर किसी को भटकना है
सामना उनसे अगर हो भी गया तो क्या हो गया
माना की ज़ख्म अभी अभी तो भरा था मेरा
उसके मिलने से हरा हो भी गया तो क्या हो गया
सच है की उसे भुलाने को वो गलियां छोड़ आया
उसने भी इसी शहर घर बनाया तो क्या हो गया
बस अभी तो मुस्कुराना शुरू ही किया था
मेरे फिर इन आँखों में आंसू आया तो क्या हो गया
कुछ मुझे भी अब उजाले रास आने लगे थे ‘मौन’
फिर अंधेरो में बिठाया तो क्या हो गया

-अमित मिश्रा

Haan machala tha kuch pal ko dil fir so gya
Aaj usse fir mil bhi liye to kya ho gya
Mohabbat ki rahon mein har kisi ko bhtkana hai
Samana unse agar ho bhi gya to kya ho gya
Mana ki jkham abhi abhi to bhara tha mera
Uske milne se hara ho bhi gya to kya ho gya
Such hai ki use bhulane ko wo galiyaan chor aaya
Usne bhi esi Shahar me ghar bnaya to kya ho gya
Bs abhi to muskurana shuru hi kiya tha
Mere fir en aankhon me aansu aaya to kya ho gya
Kuch muje bhi ab ujale raas aane lage they ‘maun’
Fir andhere me bithaya to kya ho gya

-Amit Mishra

Hindi love poem on separation-जीवन जीना हो तो


जीवन जीना हो तो कुछ तो खोना ही पड़ेगा,
चाह कर भी किसी को खोना ही पड़ेगा,
मिलना ना मिलना तो तकदीर का खेल है।
अपनी तक़दीर ही समझ कर खुद को समझना ही पड़ेगा।
कुछ तो कमी रही है जो ये सजा मिली है।
दिल मे हा है और ना चाहते हुए भी हमे ना ही मिली है।
कुसूर ना तुम्हरा है ना मेरा है मेरे यार।
बस बात इतनी सी है कि।।।।
जीवन जीना हो तो कुछ तो खोना ही पड़ेगा,
चाह कर भी किसी को खोना ही पड़ेगा।।।।

-नंदनी 

Jeevan jeena hai to kuch to khona hi padega
Chah kar bhi kisi ko khona hi padega
Milna na milna to takdeer ka khel hai
Apni takdeer hi samajh kar khud ko samjhna hi padega
Kuch to kami rahi hai jo ye saza mili hai
Dil mein haan hai aur na chahte hue bhi hamein na hi mili hai
Kasoor na tumhara hai na mera hai mere yar
Bas baat itni si hai ki
Jeevan jeena hai to kuch to khona hi padega
Chah kar bhi kisi ko khona hi padega

-Nandani

Hindi love Poem on Separation-बिरह


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आज जब वो बहुत दूर है तो
ये बिरह के आंसू थमते ही नहीं
और कहते हैं-बिरह के ये पल
शोलों से चुभ जाते हैं,
याद करके तुझको पल पल
आँखों मैं आंसू लाते हैं,
काँटो सी हैं चुभती रातें,
पल पल आग लगाती हैं,
जलती रहती पल पल
मुझको तेरी याद दिलाती हैं,
खाली सा है ये मन मेरा,
तेरे प्यार को तरसे है,
मंद मंद सी होती साँसें,
सीने में हलचल मचाती हैं,
बोझिल होती मेरी आँखें
गम के आंसू लाती हैं,
ना समझती हो तुम मेरी बातें,
ना समझेंगी अब ये आँखें,
ये तो पल पल आंसू बहायेंगी,
याद तुझे पल पल करके
ये तो रोती जाएंगी,
ये तो रोती जाएंगी
-गौरव