रात भी ला रही है ओढ़ी हुई हंसी,
शाम से धुआँ धुआँ हो रही है हंसी,
तेरे पहलू में आके कुछ थम सी गयी है ये दुनिया मेरी,
शाम को भी ना पता था की रात भी ला रही है खुशी,
शाम से धुआँ धुआँ हो रही है हंसी,
चाँद से रात का हो रहा है मिलन,
चांदनी भी ओढ़े है कोई हया की शरम,
घूंघट में छुप के आ रही है रागिनी भी कहीं,
मुस्कुराते हुए मिल रही हो तुम भी तो कहीं,
रात भी ला रही है ओढ़ी हुई हंसी,
तेरी नज़रों ने मेरी नज़रों को दे दी है खुशी,
काजल तेरी आँखों का कुछ कह गया है अभी,
होंठों पे तेरे भी मुस्कान की छा गयी है हंसी,
रात भी ला रही है ओढ़ी हुई हंसी,
शाम से धुआँ धुआँ हो रही है हंसी.
-गौरव
