Hindi Love Poem for Her-Kya Ho Tum

क्या हो तुम (कविता का शीर्षक)
तुम्हें पता है कौन हो तुम
मेरे जिंदगी की अनछुई परछाई हो तुम
समझता मैं भी अजनबी था तुझे,
मिला मुझे खुद का पता जब न था,
मिली जब पनाह तेरे प्यार की,
छोड़ हक़ीक़त सपनों में खो गया,
मिला तेरा साथ तो अपनों का हो गया,
बिताये हर एक पल ग़मों से दूर रहा मैं,
रहता जिस गुरुर में था मैं,
उससे दूर रहा मैं,
मुझे नहीं पता क्या सीखा तुमने मुझसे,
मगर इस दिल ने सीखा बहुत तुझसे,
सपनों की हक़ीक़त,
हक़ीक़त का टूटना,
ज़िन्दगी की सच्चाई,
और दिल का रूठना,
अब इससे ज़्यादा क्या बताये ये दिल
प्यार और इबादत की तालीम हो तुम
आज जाना मेरी अधूरी जिंदगी में मीठा सवाब हो तुम,
इस दिल की नहीं तुम,
ऊपर वाले की प्यारी रचना हो तुम,
ये तारीफ नहीं जुबां की,
बस वाक्या है मेरे दिल का,
रहे मेरे पास शायद वजह यही है मेरे सिर झुकाने की,
रहे तू हमेशा मेरी ज़रूरत नहीं मुझे ये बताने की,
यूं निगाहों से नहीं चाहा कभी तुझे,
ये दिल तुझपे निसार था,
ज़िन्दगी पर किसी का हक ये गवारा मुझे न था,
पर पाबंदिया उसूलों से अच्छी होंगी,
ये वक़्त से ज़्यादा तूने बताया था,
रहे उस सोने की तरह जो ढल जाता सांचे में,
रहूँ मैं उस साँचे जैसा ढले जिसकी आस में,
क्योंकि माँ तो नहीं मगर ज़िन्दगी की अंतिम सांस है तू,
आज हक़ीक़त को जाना,
ज़िन्दगी के हर किनारे का साथ है तू,
ये शब्द नहीं जज़्बात हैं मेरे,
वरना दिल-ए फ़क़ीर क्या जाने,
मेरी मुस्कान का राज़ है तू।
-राणा कौशलेंद्र प्रताप सिंह (कवि)

English Translation:

Kya Ho Tum (What do you mean to me?) (Title of the Poem)
Tumhein pata hai kaun ho tum (Do you know who are you for me)
Meri zindagi ki anchui parchayi ho tum (You are the untouchable shadow of my life)
Samajhta main bhi ajnabi tha tujhe (I too used to see you as a stranger)
Mila mujhe khud ka pata jab na tha (When I had not found myself)
Mili jab panah tere pyar ki (When I found shelter of your love)
Chod haqiqat sapno mei kho gaya (I got lost in dreams while forgetting the reailty)
Mila tera sath to apno ka ho gaya (When I got your company, I became closer to relatives)
Bitaye har ek pal gamo se door raha mai (While spending each moment with you, I forgot about all my sorrows)
Rehta jis guroor mei tha main (The pride in which I used to stay)
Us se door raha main (I became more humble)
Mujhe nahi pata kya seekha tumne mujhse (I do not know what you learnt from me)
Magar is dil ne seekha bahut tujhse (But, my heart learnt a lot from you)
Sapno ki haqiqat (The reality of dreams)
Haqiqat ka tootna (The shattering of dreams)
Zindagi ki sacchai (The truth of life) \
Aur dil ka ruthna (And the anguish of the heart)
Ab is se zyada kya bataye ye dil (Now, what more can my heart explain)
Pyar aur ibadat ki taleem ho tum (You are the teacher of love and worship)
Aj jana meri adhuri zindagi mei meetha savab ho tum (Today, I realized that your the best gift of my incomplete life)
Is dil ki nahi tum (You do not belong to this heart)
Upar wale ki pyari rachna ho tum (You are a beautiful creation of God)
Ye tareef nahi zubaa ki (This is not praise of words)
Bas wakya hai mere dil ka (It comes straight from my heart)
Rahe mere pas shayad wajah yahi hai mere sir jhukane ki (Your presence makes me more humble)
Rahe tu hamesha meri zarurat nahin mujhe ye batane ki (I do not need to tell you that I need you)
Yoon nigaho se nahi chaha kabhi tujhe (I never loved you with my eyes)
Ye dil tujhpe nisar tha (My heart fell for you)
Zindagi par kisi ka haq ye mujhe gawara na tha (I never wanted anyone to control my life)
Par pabandiya usoolo se achi hongi (But, limitations will be better than principles)
Ye waqt se zyada tune bataya tha (This was taught to me by you better than time)
Rahe us sone ki tarha jo dhal jata sanche mein (Be like gold that takes the shape of its container)
Rahu main us sanche jaisa dhale jiski aas mein (I want to be like the same gold and adapt)
Kyonki Maa to nahin magar zindagi ki antim sans hai tu (Because you are not my mother, but my least breathe)
Aj haqiqat ko jana (Today I became aware about the reality)
Zindagi ke har kinare ka sath hai tu (You are my support for life)
Ye shabd nahi jazbaat hai mere (These are not words, but my emotions)
Warna dil-ae-fakir kya jaane (Else my poor heart does not know)
Meri muskan ka raaz hai tu (You are the secret of my smile)
-Rana Kaushalendra Pratap Singh (Poet)

Hindi Love Poem for Her-Pata Nahi Kaun Hai Wo

पता नहीं कौन है वो (कविता का शीर्षक)

पता नहीं कौन है वो,
करूँ नैना बंद जब,
एक सुंदर सूरत दिखती है वो,
नहीं जानता मैं उसको,
फिर भी मेरे दिल में बसती है वो,
पता नहीं कौन है वो,
क्या मैं प्यासा, तो मेरा पानी है वो,
या मैं किस्सा, तो क्या मेरी कहानी है वो,
मैं जहाँ रहूँ, जहाँ चलूँ,
हमेशा मेरे साथ रहती है वो,
पता नहीं कौन है वो,
अंधेरे में परछाई ने भी मेरा साथ छोड़ा,
पर सुबह बनकर हमेशा मेरे साथ खड़ी रही वो,
मेरी बातों की एक लफ्ज़ भी नहीं वो,
फिर भी मेरी कविता मुकम्मल कर गयी वो,
पता नहीं कौन है वो
-अजय राजपूत (झाँसी) (कवि का नाम)

English Translation for International Readers:

Pata Nahi Kaun Hai Wo (I do not know who she is) – Title of the Poem

Pata nahi kaun hai wo (I do not know who she is),
Karu naina band jab (Whenever I close my eyes),
Ek sundar surat dikhti hai wo (I see a beautiful face of her),
Nahi janta main usko (I do not know her),
Phir bhi mere dil mein basti hai wo (Still, she stays in my heart),
Pata nahi kaun hai wo (I do not know who she is),
Kya main pyasa, to mera pani hai wo (If I am thirsty, she is my water),
Ya main kissa, to kya meri kahani hai wo (Or I am an incident and she is my story),
Main jahan rahoo, jahan chalu (Wherever I live, wherever I walk),
Hamesha mere sath rehti hai wo (She always stays with me),
Pata nahi kaun hai wo (I do not know who she is),
Andhere mein parchayi ne bhi mera sath choda (In the dark, even my shadow left me),
Par subah bankar hamesha mere sath khadi rahi wo (But, she always stood my me like a morning),
Meri bato ki ek lafz bhi nahi wo (She is not even a word in my talks),
Phir bhi meri kavita mukammal kar gayi wo (Still, she completed my poem),
Pata nahi kaun hai wo (I do not know who she is).

Ajay Rajput (Jhansi) (Name of the Poet)

Hindi Poem for Dream Girl-Sach-Sach Batao Yar Kaun Ho Tum

सच- सच बताओ यार कि कौन हो तुम

सोचते – सोचते थक गया हूँ मैं, फिर भी सोचता रहा,
लेकिन फिर भी नहीं समझ पाया,
कि कौन हो तुम,
क्या भूखे के पेट की रोटी की तलाश हो तुम,
या प्यासे को पानी की तलाश हो तुम,
या फिर जिंदगी की बीती हुई यादों का अहसास हो तुम,
या बरसो बाद माँ से मिलने पर प्यार की बरसात हो तुम,
क्या शायर की शायरी का शब्द हो तुम,
या कवियों की पंक्तियों में भाव देने वाला शब्द हो तुम,
या फिर फूल की पत्तियों की सुगंध हो तुम,
या बादलों से बरसते पानी की ठंडी फुहार हो तुम,
क्या अंधेरो में जो उजाला कर दे ,
क्या वो प्रकाश हो तुम,
या राहों में जो जलता है,
क्या वो महताब हो तुम,
या फिर जो सपनों मे आए ,
क्या वो ख्वाब हो तुम,
या किसी के पूछे सवाल का जबाब हो तुम,
जिसकी ध्वनि से मन प्रसन्न हो जाए,
क्या वो शंख हो तुम,
या जो पानी और दूध को अलग करदे,
क्या वो हंस हो तुम,
या पपीहा जिस बूंद के लिए बरसो प्यासा रहता है,
क्या वो स्वाती हो तुम,
छिपे है तुम्हारे चेहरे में कई राज,
क्या वो नकाब हो तुम,
जो हर टूटे दिल वाले के जुबां पर है,
क्या वो अल्फ़ाज़ हो तुम,
जिसको कभी खोला ना जा सके,
क्या वो राज़ हो तुम,
कितनी बार पूछ चुका हूँ तुमसे,
फिर भी क्यों मौन हो तुम,
अब तो सच-सच बता दो यार
कि कौन हो तुम,
-अजय राजपूत (झांसी)

Hindi Love Poem for Girlfriend – सपनो में

hindipoem1

रोज सपनो में आती रहती हो
मुझमें खुद को जगाती रहती हो
क्या इरादा है बेबी जो यूँ
कुछ कुछ लिखवाती रहती हो

वो सपनो की क्या बातें है
जो जगी जगी सी आजकल सारी रातें है
झूठ मुठ का रूठो ना तो
रात भर प्यार से मनाती रहती हो
रोज सपनो रहती हो

लोग पूछते है क्या लिखता है
किसके लिये लिखता है
रोज रोज ये बेवजह पन्ना क्यों भरता है
मेरे चहरे से सबको खुद से मिलवाती रहती हो
रोज सपनो में आती रहती हो

मैं दिवाना हूँ जो पागल हो जाऊँगा
बिन निंदो क सपनो में खो जाऊँगा
जिस रात न हो इंतज़ार करवाती रहती हो 
रोज सपनो मैं आती रहती हो
मुझमे खुद को जगाती रहती हो

-योगेश जमदागनी

 

Roj Sapno mein aati rehti ho
Mujhme khud ko jagati rehti ho
Kya irada h baby Jo Yu
kuch kuch likhwati rehti ho

Wo sapno ki kya baten hain
Jagi jagi Si ajkal sari raten hain
Jhuth- muth ka ruthoo na  to
Rat bhar pyar se manati rehti ho
Roj sapno mein aati rehti ho

Log puchte hain kya likhta hain
Kiske liye likhta hain
Roj roj ye bewajh panne kyu bharta hain
Mere chehre se sabko khud se milwati rehti ho
Roj sapno mein aati rehti ho

Main deewana Hu Jo pagal Ho jaunga
Bin neendo k sapno me kho jaunga
Jis rat na Ho intejjar krwati rehti ho
Roj sapno mein aati rehti ho
Mujh mein khud ko jagati rehti ho

-Yogesh Jamdagni