सपनाआज उदास सी है सुबह,पर पास कोई नहींइन चाय की चुस्कियों मेंउनके साथ का वो स्वाद नहीं,कितनी बेसुध सी लगती है ये ज़िंदगीअब उनके बिना,ये सोचता हूँ महसूस करता हूँ,प्यार बढ़ता जाता है अपनाएक सपना आया मुझेकी वो चली गयी मुझे छोड़ के,तब से मैने खाई कसमगले लगाया उसे ज़ोर सेइस सपने ने मुझे जगायाउसे खोने का एहसास दिलायाशुकर गुज़र हूँ इस सपने काये मुझे उसके और करीब लाया-प्रवीन गोस्वामी
