एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,कि इनमें छुपा है प्यार बस मेरे लिये मेरे लिये,एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,कि पहलू में तेरे बैठ के, तेरी ज़ुल्फ़ों से यूँ खेल के,बस दिल से मैं लिखता रहा, तुझे सोचते बस तुझे सोचते,एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,कि शाम भी अब ढल गयी, तेरे पहलू में सिमट गयी,कि चांदनी भी अब तेरे हुस्न से पिघल गयी,एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,गीतों को लिखता रहूँ, तुझ में ही मैं जीता रहूँ,कि मेरी धड़कन भी तेरी धडकनों से जुड़ गयी,एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,अल्फ़ाज़ भी मेरे नहीं, ये गीत भी मेरा नहीं,बस तू ने जो ना कहा लिख दिया तुझे सोच के,एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,कि वक़्त भी अब थम गया, जो तूने वो कह दिया,कि आए मेरे हमसफर ये दिल भी है तेरे लिये,एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,जब मैने वो सुन लिया, धड़कन को तेरे जी लिया,तुझे पहलू में समेट के होश में ना मैं रहा,एक ग़ज़ल लिखी तेरे पहलू में तेरी आँखों को यूँ देख के,कि इन में छुपा है प्यार बस मेरे लिये बस मेरे लिये|-गौरवEk gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki inmein chupa hai pyar bas mere liye mere liye,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki pahlu mein tere baith ke, teri zulphon se yoon khel ke,
Bas dil se main likhta raha, tujhe sochte bas tujhe sochte,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki sham bhi ab dhal gayi, tere pahlu mein simat gayi,
Ki chandni bhi ab tere husn se pighal gayi,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Geeton ko likhta rahoon, tujh mein hi main jeeta rahoon,
Ki meri dhadkan bhi teri dhadkanon se jud gayi,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Alfaz bhi mere nahin, ye geet bhi mera nahin,
Bas tu ne jo na kaha likh diya tujhe soch ke,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki waqt bhi ab tham gaya, jo toone wo kah diya,
Ki ae mere hamsafar ye dil bhi hai tere liye,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Jab maine wo sun liya, dhadkan ko tere jee liya,
Tujhe pahlu mein samet ke hosh mein na main raha,
Ek gazal likhi tere pahlu mein teri aankhon ko yoon dekh ke,
Ki in mein chupa hai pyar bas mere liye bas mere liye|
-Gaurav
Category: Hindi Love Poems in College Love
Hindi Love Shayari for Her-तेरी सांसों में

तेरी सांसों में मिल जायें मेरे सांसें,
तेरी बातों मे घुल जायें मेरी बातें,
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तेरी रातों से मिल जायें मेरी रातें,
हम दोनों में हो जायें मुहब्बतें
-अमिर्धा
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Hindi Love Poetry on Dream Girl-कविता से मुलाकात हो गयी

कविता से मुलाकात हो गयी
तन्हा मेरी ज़िंदगी में ख्वाबों की बरसात हो गयी,
एक दिन था अकेला, कविता से मुलाकात हो गयी,
कुछ वो मुझसे कहने लगी कुछ मैं उसे कहने लगा,
एक अनजाने अपने पहलू से मीठी कुछ बात हो गयी,
वो मेरे शब्दों में घुल गयी कविता बन के ज़िंदगी की कहानी कह गयी
तन्हाई के आलम से बाहर आने लगा अकेलेपन में मेरी हमसफर वो हो गयी,
कल्पना करता हूँ जब भी उसकी खूबसूरती की उसकी गहराई में डूब जाता हूँ,
ज़िंदगी के मेरे हर पल को एक पल में वो जीवन कर गयी,
शब्दों का ना वो जाल है ना कोई मायाजाल,
वो तो बस मेरे दिल का हाल है इतनी बात वो कह गयी,
हर खुशी हर गम को मेरे साथ वो सहती है
कुछ ना कहती है मुझसे हर पल हंसाती रहती है
रूप अनेक बनाती है कभी ग़ज़ल है,
कभी है कविता, कभी शायरी वो कहलाती,
बस ओढ़ चुनरिया खुशियों की
वो मेरे दिल को छू के जाती,
रात की गहराई हो या दिन का पहर
साथ मेरे वो रहती है,
कभी रूठती है मुझसे कभी खेलती है
मेरे संग मेरी कल्पना में जीती है,
अब ना जीना उसके बिन,
मेरी सांसों में मेरी रूह में धड़कन बन के वो बस गयी,
तन्हा मेरी ज़िंदगी में ख्वाबों की रात हो गयी,
एक दिन था अकेला कविता से मुलाकात हो गयी
-गौरव
Hindi Love Shayari Poetry on Eyes-निगाहों की गलतियाँ

निगाहों की गलतियाँ
सब गलतियाँ निगाहों की हैं,
क्यों दिखाती हैं ख्वाब,
क्यों दिलाती हैं एहसास जब
पूरे ना हो पायें वो ख्वाब,
सब गलतियाँ निगाहों की हैं,
एक पल मैं देखता हूँ
कोई मुस्कुरा दे तो दीवानी हो जाती हैं,
छोटी छोटी बातों पे खुशियों का
परवाना हो जाती हैं,
बिछा देती हैं खुद को किसी के प्यार में,
सब लुटा देती हैं,
सब गलतियाँ निगाहों की हैं,
कभी सोचती हैं हो गया प्यार हमको,
कभी किसी की रुसवाई में रो देती हैं,
मिलता नहीं जिसे वो चाहे तो
कुछ और देखना नहीं चाहती हैं,
सब गलतियाँ निगाहों की हैं,
हर बात का खुद से मतलब निकाल लेती हैं,
बिन जाने किसी और की हो जाती हैं,
घंटो तक इंतज़ार करती हैं
किसी के आने का पलकों को बिछा के,
जब नहीं आता है वो तब मान नहीं पाती हैं
और आस उसके आने की लगाती हैं,
सब गलतियाँ निगाहों की हैं,
मैं पूछता हूँ
क्यों देखती हो ख्वाब किसी के,
क्यों चाहती हो बेपनाह किसी को,
वो मेरी बात पे
थोड़ा सा मुस्कुरा देती हैं,
बस कुछ कह नहीं पाता उनको
क्योंकि मेरी निगाहें भी ये गलती
बार बार किया करती हैं,
सब गलतियाँ निगाहों की हैं.
-गौरव
Nigahon Ki Galtiyan
Sab galtiyan nigahon ki hain,
kyon dikhati hain khwab,
kyon dilati hain ehsas jab
pure na ho payein wo khwab,
sab galtiyan nigahon ki hain,
ek pal main dekhta hoon
koi muskurake to deewani ho jati hain,
choti choti baton pe khushiyon ka
parwana ho jati hain,
bicha deti hain khud ko kisi ke pyar mein,
sab luta deti hain,
sab galtiyan nigahon ki hain,
kabhi sochti hain ho gaya pyar humko,
kabhi kisi ki ruswai mein ro deti hain,
milta nahin jise wo chahe to
kuch aur dekhna nahin chahti hain,
sab galtiyan nigahon ki hain,
har bat ka khud se matlab nikal leti hain,
bin jane kisi aur ki ho jati hain,
ghanto tak intazar karti hain
kisi ke aane ka palkon ko bicha ke,
jab nahin aata hai wo tab maan nahin pati hain
aur aas uske aane ki lagati hain,
sab galtiyan nigahon ki hain,
main puchta hoon
kyon dekhti ho khwab kisi ke,
kyon chahati ho bepanah kisi ko,
wo meri bat pe
thoda sa muskura deti hain,
bas kuch kah nahi pata unko
kyonki meri nigahein bhi ye
galti bar bar kiya karti hain,
sab galtiyan nigahon ki hain.
-Gaurav

