यादों के झरोखों में


यादों के झरोखों में मिलता है मीत कोई
दिल की तरंगों से बजता है संगीत कोई
जैसे पानी को तरसता है पक्षी प्यासा
वैसे मांगू तुझे मिल जाए तू ज़रा सा
जहाँ देखू आता है तू ही बस नज़र
तेरे लिए कितना हूँ  बेताब तुझे क्या खबर
आज तक जिंदा हूँ तुझसे मिलने की ही आस में
वो लम्हा कब आयेगा ऐ खुदा जब तू होगा पास में

प्यार के नगमें खोजने चला है दिल


प्यार के नगमें खोजने चला है दिल
अब मैं सजा लूं वीरान इस दिल की महफ़िल
कभी तो बात कर मुझसे कभी तो आकर मिल
तेरी यादों में ही गुज़रते हैं अब मेरे रात और दिन
अब जुदाई न सही जाये हो गयी है बड़ी मुश्किल
अब आजा पास मेरे ऐ मेरे हसीन कातिल

सब जगह तू नहीं तो तेरा नाम है


सब जगह तू नहीं तो तेरा नाम है
क्या कहें तेरा आशिक क्यों बदनाम है
दिल से निकलती है तेरे लिए सिर्फ दुआ
तू क्या जाने तूने दिल को  कैसे है छुआ
अब तो तेरे प्यार में है जीना सिर्फ जीना
ये आशिकी का जाम हमने भी पीना
तू आजाये अगर महफ़िल में तो है बहार
वरना फूलों की बहार भी है बेकार
और क्या कहूँ तेरी तारीफ में ओ ज़ालिम
कैसे करता है तू बिना खंज़र के क़त्ल-ऐ-रहम

Ishq Sufiyana – इश्क सूफियाना


लफ्ज़ बन जाते हैं जब दिल की जुबां
बस हो जाता है अंदाजे इश्क पर खुदा मेहरबां
एक खुदा वो है जो करता आया है बस रहमो करम
एक खुदा तू है जो बनके मोहब्बत करता है क़त्ल-ऐ-रहम
सब कहते हैं इश्क में कहाँ और क्या मज़ा पाते हो सूफियाना
उनको क्या खबर – इश्क की गलियों में मिलते हैं जाम आशिकाना

Love poem -कब से कहना चाहता हूँ


couple-1521404_960_720
कब से कहना चाहता हूँ कह नहीं पाता
पास रहना चाहता हूँ रह नहीं पाता
जब से तुम मिले हो फूल बिछे राह
और काटें हो गए सब ही तबाह
तुम्हारी मुस्कुराहट सबसे खूबसूरत है
दुनिया में क्या तुमसे भली भी कोई मूरत है
चाहता हूँ रखना तुमको सबसे करीब
खुदा काश ऐसे हों मेरे नसीब